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कंधों पर सितारे, आंखों में सपने… देश सेवा के जुनून ने रचा नया इतिहास।

आईएमए की पासिंग आउट परेड में 515 युवा बने सेना के अधिकारी, परिजनों की आंखें गर्व और भावनाओं से हुईं नम।

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो प्रमोद बमेटा, देहरादून।

जब मां-बाप ने अपने बेटों और बेटियों के कंधों पर चमकते सितारे सजाए तो भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) का परिसर गर्व, सम्मान और भावनाओं के अनूठे संगम का साक्षी बन गया। स्प्रिंग टर्म-2026 की पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं थी, बल्कि उन हजारों सपनों की मंजिल थी, जिनके लिए युवा कैडेटों और उनके परिवारों ने वर्षों तक संघर्ष, त्याग और समर्पण का रास्ता तय किया।

शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में 515 अधिकारी कैडेट भारतीय सेना का हिस्सा बने। इनमें नौ महिला कैडेट भी शामिल रहीं, जिन्होंने यह संदेश दिया कि देश सेवा का जज्बा किसी सीमा का मोहताज नहीं होता।

परेड के बाद हुए पारंपरिक पिपिंग समारोह में हर ओर खुशी, गर्व और भावुकता का माहौल था। माता-पिता अपने बच्चों के कंधों पर रैंक लगाते हुए भावनाओं को छिपा नहीं सके। कई परिवारों के लिए यह पल सैन्य परंपरा की नई कड़ी था, जहां दादा और पिता के बाद अब बेटे-बेटियां भी देश सेवा के मार्ग पर आगे बढ़े हैं।

पूर्वी लद्दाख में तैनाती पाने वाली नव नियुक्त अधिकारी शन्नन ढाका ने बताया कि सेना उनके लिए केवल नौकरी नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है। सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली शन्नन ने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करने का संदेश दिया। उनके पिता ने विशेष रूप से बेटियों को सेना में भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया।

इस बार की परेड में प्रतिभा और नेतृत्व का भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कैडेट एडजुटेंट विशाल कुमार ने ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और स्वर्ण पदक हासिल कर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय बचपन के उस सपने को दिया, जिसमें उन्होंने खुद को सेना की वर्दी में देखा था। वहीं प्रिंस राज ने रजत पदक और तेजस भट्ट ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

विदेशी कैडेटों में भी भारतीय सैन्य प्रशिक्षण की चमक दिखाई दी। 16 मित्र देशों से आए 34 विदेशी कैडेटों में जैफ सादिद अल्वी को ‘बेस्ट फॉरेन कैडेट’ ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह सम्मान आईएमए की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है।

बिहार के लेफ्टिनेंट सौरभ चौधरी के लिए यह उपलब्धि और भी खास रही। एक सैनिक पिता के इकलौते बेटे सौरभ ने जब सेना की वर्दी पहनी तो उनके पिता की आंखों में गर्व के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि यह केवल उनके बेटे की नहीं बल्कि पूरे परिवार की वर्षों की तपस्या का परिणाम है।

रामनगर के तीन सपूतों ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान

आईएमए की इस ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड में रामनगर स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल, हेमपुर ने भी नया इतिहास रच दिया। विद्यालय के तीन पूर्व छात्र—अभिनव जोशी, गजेंद्र सिंह और शुभन बलोदी—एक साथ भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने। राष्ट्रपति की उपस्थिति में कमीशन प्राप्त करने वाले इन युवाओं ने विद्यालय, परिवार और पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

विद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि छात्रों की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

युवा पीढ़ी को मिला संदेश

आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल सैन्य अधिकारियों के कंधों पर सितारे सजाने का समारोह नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि देश सेवा का जुनून आज भी युवाओं की धड़कनों में जीवित है। बदलते दौर में जहां करियर के अनेक विकल्प मौजूद हैं, वहीं सैकड़ों युवाओं ने मातृभूमि की रक्षा को अपना जीवन लक्ष्य चुना। यही जज्बा भारत की सैन्य शक्ति की असली पहचान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत भी।

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