जनसेवा ने बढ़ाया कद, अब जनता ने राजनीति में आने का दिया न्योता !
गौलापार हादसे के पीड़ित परिवार के लिए शुभम अंडोला ने दिए ₹2 लाख, मित्रों ने ₹50-₹50 हजार; अपील पर जुटी 6.5 लाख से अधिक की मदद, संघर्ष से निकले समाजसेवी को अब जनप्रतिनिधि के रूप में देखना चाहती है लालकुआं की जनता!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। किसी जरूरतमंद के दर्द को महसूस करना और फिर उसकी मदद के लिए खुद आगे बढ़ना, यह संवेदना हर किसी में नहीं होती। लेकिन हल्दूचौड़ निवासी समाजसेवी एवं उद्यमी शुभम अंडोला ने सेवा और परोपकार को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। वर्षों से जरूरतमंदों की मदद करते आ रहे शुभम अंडोला अब केवल समाजसेवा के कारण ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संभावित राजनीतिक चेहरे के रूप में भी चर्चा में हैं। क्षेत्र का एक वर्ग उन्हें जनप्रतिनिधि के रूप में देखना चाहता है।
हालांकि शुभम अंडोला स्वयं राजनीति में आने से इनकार करते रहे हैं, लेकिन उनकी लगातार बढ़ती सामाजिक सक्रियता और जनता के बीच बनी स्वीकार्यता ने लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में एक नई राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
गौलापार क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे ने शुभम अंडोला को भीतर तक झकझोर दिया। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से जब उन्हें पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने परिवार की ओर से ₹2 लाख की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया।
इस मानवीय पहल में उनके मित्र एडवोकेट प्रकाश सनवाल ने ₹50 हजार और अंकित अग्रवाल ने ₹50 हजार की सहायता देने की घोषणा की। इसके बाद शुभम अंडोला ने समाज के सक्षम लोगों से पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
शुभम की अपील का असर ऐसा हुआ कि लोग मदद के लिए आगे आते गए और पीड़ित परिवार के लिए लगभग ₹6 से ₹6.5 लाख से अधिक की आर्थिक सहायता एकत्रित हो गई। यह केवल एक परिवार की मदद नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में समाज के एकजुट होकर खड़े होने की मिसाल बन गई।
शुभम का कहना है कि हादसे में जिन लोगों को परिवार ने खोया है, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन सामूहिक सहयोग से परिवार के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का प्रयास जरूर किया जा सकता है। उनका मानना है कि जरूरतमंद की मदद करना ही सच्ची मानवता और सबसे बड़ा धर्म है।
शुभम अंडोला की समाजसेवा की कहानी उनकी अपनी संघर्ष यात्रा से जुड़ी है। वर्ष 1989 में उनका परिवार बागेश्वर से हल्द्वानी आया और शुरुआती दिनों में किराए के मकान में रहा। वर्ष 2002 में उन्होंने अपने ताऊ जी से ₹20 हजार की आर्थिक मदद लेकर पीसीओ-एसटीडी का कारोबार शुरू किया।
वर्ष 2003 में सेकंड हैंड कार खरीदने के लिए उन्होंने अपने पड़ोसी गोविंद सिंह राणा से ₹10 हजार की मदद ली। इसके बाद उन्होंने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा। दीपावली पर सड़क किनारे पटाखे बेचे, रक्षाबंधन पर राखियां और न्यू ईयर पर ग्रीटिंग कार्ड तक बेचे।
उन्होंने कपड़े सिलने का काम किया, टैक्सी चलाई और वर्ष 2005 से 2008 तक गौला में डंपर का काम भी किया। उनका लक्ष्य हमेशा आत्मनिर्भर बनने का रहा। संघर्ष के इन अनुभवों ने उन्हें समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग के दर्द को समझने का अवसर दिया।
शायद यही कारण है कि आज जब कोई परिवार संकट में होता है तो शुभम अंडोला केवल सहानुभूति व्यक्त करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार मदद के लिए आगे आते हैं।
कैंसर पीड़ित बच्चे से लेकर गंभीर संकट में फंसे परिवारों तक पहुंची मदद
शुभम अंडोला की समाजसेवा का दायरा एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं है। कैंसर पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे शौर्य कुमार के इलाज के लिए मदद की मुहिम शुरू करने से लेकर दुर्घटना में घायल बच्ची श्रीजना के उपचार के लिए ₹21 हजार की आर्थिक सहायता देने तक उन्होंने जरूरतमंदों का साथ दिया है।
मोटाहल्दू के पड़लीपुर निवासी राधाकृष्ण पाठक के परिवार पर जब विपत्तियों का पहाड़ टूटा तो शुभम अंडोला मदद के लिए पहुंचे। आग से झुलसे राधाकृष्ण पाठक, पैरालिसिस से जूझ रही उनकी पत्नी और घायल बेटे की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपने पुत्र दक्ष अंडोला के हाथों परिवार को ₹11 हजार नकद के साथ 25 किलो आटा और 25 किलो चावल उपलब्ध कराया।
इसी तरह कैंसर पीड़िता पुष्पा देवी के इलाज के लिए शुभम ने अपने मित्रों के सहयोग से ₹26 हजार की सहायता जुटाई। इसमें शुभम ने ₹11 हजार, एडवोकेट प्रकाश सनवाल, और लाखन सिंह मेहता ने ₹5,100-₹5,100 का सहयोग किया।
नवरात्र में मजदूर बस्ती में कन्या पूजन के दौरान जरूरतमंद परिवार को आर्थिक मदद देने से लेकर अन्य सामाजिक कार्यों तक, शुभम लगातार समाज के कमजोर वर्ग के बीच सक्रिय रहे हैं।
उनकी सामाजिक सक्रियता को देखते हुए पंखुड़िया सांस्कृतिक, पर्यावरण एवं दिव्यांग कल्याण समिति हल्दूचौड़ की ओर से उन्हें ‘हल्द्वानी रत्न’ सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
शुभम अंडोला की बढ़ती सामाजिक सक्रियता के बीच अब लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में एक नई चर्चा भी जोर पकड़ रही है। समर्थकों और शुभचिंतकों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि शुभम आगामी विधानसभा चुनाव में जनप्रतिनिधि के रूप में सामने आएं।
समर्थकों का तर्क है कि जो व्यक्ति बिना किसी राजनीतिक पद के वर्षों से जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उनकी मदद कर रहा है, वह जनप्रतिनिधि बनने के बाद जनता की समस्याओं को और मजबूती से उठा सकता है।
गौलापार हादसे के बाद शुभम की एक अपील पर 6.5 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि जुटना भी उनके प्रति लोगों के भरोसे और सामाजिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल शुभम की व्यक्तिगत मदद नहीं थी, बल्कि उनकी अपील पर समाज का एक बड़ा वर्ग एक परिवार के साथ खड़ा हो गया।
हालांकि शुभम अंडोला स्वयं राजनीति में आने की इच्छा से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि वह राजनीति से दूर रहकर समाजसेवा के माध्यम से लोगों की मदद करना चाहते हैं।
लेकिन जनभावनाएं कई बार व्यक्ति की निजी इच्छा से आगे निकल जाती हैं। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में शुभम अंडोला को लेकर उठ रही राजनीतिक चर्चा इसी ओर इशारा कर रही है।
लालकुआं की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई चेहरे चर्चा में हैं। ऐसे में शुभम अंडोला का नाम भी समाजसेवा के रास्ते से राजनीतिक चर्चा तक पहुंच चुका है।
एक तरफ शुभम अंडोला का राजनीति से दूर रहने का स्पष्ट रुख है, तो दूसरी तरफ समर्थकों और शुभचिंतकों की लगातार बढ़ती मांग।
अब देखना यह होगा कि जनभावनाओं का यह दबाव शुभम अंडोला को अपनी राह बदलने के लिए प्रेरित करता है या वह राजनीति से दूर रहकर समाजसेवा को ही अपना जीवन मिशन बनाए रखते हैं।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि गौलापार हादसे के बाद उनकी अपील पर पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद ने यह साबित कर दिया कि शुभम अंडोला की आवाज पर लोग भरोसा करते हैं और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होने को तैयार हैं।
यही भरोसा अब एक नए सवाल को जन्म दे रहा है क्या लालकुआं की जनता 2027 में समाजसेवा के इस चेहरे को जनप्रतिनिधि के रूप में देखना चाहती है?
