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एक अपील… और बढ़ते गए मदद के हाथ, गौलापार हादसा पीड़ित परिवार के लिए इंसानियत बनी सहारा!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। गौलापार में हुए दर्दनाक हादसे ने जिस तरह लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया, उसी दर्द ने समाज के भीतर इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर भी सामने ला दी, जो उम्मीद जगाती है। हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवार की मदद के लिए जब समाजसेवी शुभम अंडोला ने आगे बढ़कर सहयोग का हाथ थामा और अन्य लोगों से भी मदद की अपील की, तो देखते ही देखते मदद के हाथ बढ़ते चले गए।
शुभम अंडोला की इस अपील का असर लगातार दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कोई आर्थिक सहयोग कर रहा है तो कोई अपने स्तर से परिवार का दर्द बांटने का प्रयास कर रहा है। इस पहल ने साबित कर दिया है कि दुख की घड़ी में समाज अगर एकजुट हो जाए तो किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी ताकत बन सकता है।
इसी मानवीय मुहिम में एक और कड़ी उस समय जुड़ी, जब हल्दूचौड़ के प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी हरमेल गार्मेंट्स के स्वामी भुवन चंद्र जोशी ने अपने परिवार की ओर से पीड़ित परिवार को 11 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
भुवन चंद्र जोशी की इस संवेदनशील पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि इंसानियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। जरूरत के समय किसी दुखी परिवार के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी सेवा है।
इससे पहले शुभम अंडोला स्वयं पीड़ित परिवार की सहायता के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से भी इस परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की थी। उनकी इस पहल के बाद लगातार लोग सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं और पीड़ित परिवार की मदद के लिए एकजुटता का सिलसिला जारी है।
भुवन चंद्र जोशी की सहायता पर शुभम अंडोला ने उनका और उनके पूरे परिवार का दिल की गहराइयों से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में जिस तरह लोग संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार के साथ खड़े हो रहे हैं, वह समाज की एकजुटता और इंसानियत की मिसाल है।
गौलापार हादसे की पीड़ा भले ही कभी भुलाई नहीं जा सकेगी, लेकिन इस दुख के बीच जिस तरह मदद के हाथ लगातार आगे बढ़ रहे हैं, वह पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ा संबल जरूर बन रहा है। एक व्यक्ति की अपील से शुरू हुई यह मुहिम अब सामूहिक संवेदना का रूप लेती जा रही है, और यही इस कहानी का सबसे मानवीय पहलू है।

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