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नई शुरुआत से पहले खुलें पुरानी फाइलों के पन्ने!

भूषण फार्मास्युटिकल्स से जुड़े पुराने संचालन पर यूसीएफ से जवाब का इंतजार!

दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता।।

हल्दूचौड़। उत्तराखंड की आयुर्वेदिक दवा उत्पादन व्यवस्था से जुड़ी हल्दूचौड़ की यूएमपीएल और रानीखेत की को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी (सीडीएफ) को नए सिरे से संचालित करने की कवायद के बीच इनके पुराने संचालन से जुड़े दस्तावेज और जिम्मेदारियां भी चर्चा में हैं। इकाइयों के पुनर्जीवन की तैयारी के बीच सवाल उठ रहा है कि पिछली व्यवस्था से जुड़े मामलों की समीक्षा और उसका पूरा विवरण भी सामने आएगा या नहीं।

खास तौर पर भूषण फार्मास्युटिकल्स से जुड़े पुराने संचालन को लेकर यूसीएफ की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि यूसीएफ ने संबंधित मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में मुख्य सवाल यही है कि इस प्रकरण में यूसीएफ ने क्या कार्रवाई की और उसका रिकॉर्ड क्या कहता है?

पुराने संचालन की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत!

यदि यूएमपीएल अथवा सीडीएफ के संचालन से संबंधित किसी अवधि में भूषण फार्मास्युटिकल्स की भूमिका रही है तो संबंधित अनुबंध, उसकी शर्तों और जिम्मेदारियों की जानकारी सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्धारित शर्तों के अनुसार संचालन हुआ या नहीं और संबंधित अवधि में यूसीएफ की निगरानी व्यवस्था क्या थी।

यदि किसी स्तर पर गुणवत्ता, उत्पादन, वित्तीय प्रबंधन अथवा अनुबंध की शर्तों को लेकर शिकायत या विभागीय आपत्ति सामने आई थी तो उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

यूएमपीएल के मामले में विभागीय आदेश में अधोमानक नमूनों का उल्लेख!

आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखंड निदेशालय के एक अगस्त 2025 के कार्यालय आदेश में यूएमपीएल हल्दूचौड़ द्वारा आपूर्ति की गई औषधियों के नमूनों की जांच का उल्लेख है। आदेश के अनुसार 19 औषधियों के नमूनों की जांच में च्यवनप्राश और लशुनादि वटी को गुणवत्तायुक्त पाया गया, जबकि कई अन्य नमूने अधोमानक पाए गए। चार नमूनों के संबंध में ‘नो ओपिनियन’ दर्ज किया गया।

आदेश के अनुसार अधोमानक औषधियों के मामले में संबंधित आपूर्ति आदेश निरस्त किया गया। संबंधित फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब प्राप्त न होने के बाद यूएमपीएल को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने और विभागीय औषधि खरीद निविदाओं में भाग लेने से डिबार किए जाने का भी उल्लेख आदेश में है।

सीडीएफ रानीखेत के मामले में भी कार्रवाई!

सात अगस्त 2025 के विभागीय आदेश में सीडीएफ रानीखेत द्वारा आपूर्ति की गई वातविध्वंसन रस के नमूने को जांच में अधोमानक पाए जाने का उल्लेख है। इसके बाद आपूर्ति आदेश निरस्त किए जाने और फैक्टरी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी आदेश में दर्ज है।

विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट में उत्पादन और अभिलेखों से संबंधित कुछ बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में मशीनरी एवं उपकरणों की स्थिति, कच्ची औषधियों के भंडारण और स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित टिप्पणियां भी दर्ज थीं।

स्थानीय स्तर पर भी जानकारी का अभाव!

इस संबंध में वर्तमान में यूएमपीएल में कार्यरत आयुर्वेदाचार्य डॉ. रवि शंकर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व में की गई कार्रवाई उनके संज्ञान में नहीं है।

वहीं, यूसीएफ के प्रबंधक त्रिलोचन पाठक ने कहा कि इस संबंध में जो भी जानकारी चाहिए, वह आरटीआई के माध्यम से ली जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित जानकारी यूसीएफ मुख्यालय, देहरादून से ही उपलब्ध कराई जा सकती है।

पुनर्जीवन के साथ पुरानी फाइलों का हिसाब भी जरूरी!

यूएमपीएल हल्दूचौड़ और सीडीएफ रानीखेत को आधुनिक मशीनरी और बेहतर व्यवस्था के साथ दोबारा संचालित करने की योजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे आयुर्वेदिक दवा उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

लेकिन नई व्यवस्था शुरू करने से पहले पुराने संचालन से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना भी जरूरी है। खासकर यह जानकारी सामने आनी चाहिए कि भूषण फार्मास्युटिकल्स से संबंधित पुराने संचालन में यूसीएफ की भूमिका क्या थी, क्या शर्तें तय थीं और उस अवधि के बाद यूसीएफ स्तर से क्या कार्रवाई की गई।

यह सवाल किसी संस्था या कंपनी पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

नई मशीनरी के साथ नई व्यवस्था शुरू हो, लेकिन पुरानी फाइलों के सवाल भी अनुत्तरित न रहें—यही इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल है।

उत्तराखंड