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सीएम पोर्टल का भी मखौल! दस महीने से खुदी गली, शिकायत के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार!

गड्ढों में जिंदगी, अफसरशाही के आगे बेबस जनता, विष्णुपुरी की बदहाल गली ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। आम जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाए गए सीएम पोर्टल की व्यवस्था पर विष्णुपुरी गली नंबर-10 की बदहाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है। करीब दस महीने से गली खुदी पड़ी है, जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और बारिश में इनमें पानी भर जाने से राहगीरों के लिए सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया।

गली की हालत देखकर ऐसा लगता है कि शिकायतें पोर्टल पर तो पहुंच रही हैं, लेकिन समाधान की जमीन तक नहीं पहुंच पा रहा हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक आए दिन राहगीर गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह रास्ता लगातार जोखिम भरा बना हुआ है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे।

विष्णुपुरी गली नंबर-10 में विशाल प्राचीन दुर्गा मंदिर भी स्थित है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे गड्ढों, कीचड़ और पानी से होकर मंदिर तक पहुंचने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भयावह हो जाती है, क्योंकि पानी भरने के बाद गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब समस्या दस महीने से अधिकारियों के संज्ञान में है और सीएम पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज हो चुकी है, तो आखिर कार्रवाई कहां अटक गई? क्या शिकायत का मतलब केवल उसे पोर्टल पर दर्ज कर देना और कागजों में निस्तारण दिखा देना रह गया है? यदि ऐसा नहीं है तो मौके पर सड़क की मरम्मत क्यों नहीं हुई?

सीएम पोर्टल को जनता अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद के तौर पर देखती है। लेकिन जब शिकायत के बाद भी महीनों तक सड़क जस की तस पड़ी रहे तो पोर्टल की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें शिकायत दर्ज कराने के बाद आश्वासन तो मिलता है, लेकिन समस्या वहीं की वहीं रहती है।

विष्णुपुरी की यह गली अफसरशाही की उस कार्यशैली का उदाहरण बनती जा रही है, जहां जनता की परेशानी फाइलों और रिपोर्टों में दब जाती है। दस महीने से सड़क जख्मी है, राहगीर परेशान हैं, श्रद्धालु जोखिम उठा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर व्यवस्था को जगाने के लिए जनता को और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी बड़े हादसे के बाद अधिकारी जागते हैं तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता होगी। लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने, सड़क की मरम्मत कराने और शिकायत के बावजूद कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

सवाल सिर्फ एक गली का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाली शिकायत भी अगर दस महीने तक समाधान का रास्ता न तलाश सके तो आम आदमी आखिर किस दरवाजे पर दस्तक दे?

स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा है कि अब उन्हें कागजी आश्वासन नहीं चाहिए। उन्हें विष्णुपुरी गली नंबर-10 में जमीन पर काम और सुरक्षित रास्ता चाहिए। अधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना यदि यही रवैया जारी रहा तो सीएम पोर्टल जनता की उम्मीद का माध्यम बनने के बजाय महज शिकायत दर्ज कराने की औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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