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थमने का नाम नहीं ले रही लकड़ी तस्करी, वन प्रभागों की निगरानी पर उठे सवाल!

तराई केंद्रीय वन प्रभाग में खैर तस्करी के बाद अब तराई पूर्वी में शीशम-सिरस की चिरान से भरा कैंटर बरामद!

लालकुआं। तराई के जंगलों में बेशकीमती लकड़ी के अवैध कारोबार पर आखिर लगाम कब लगेगी? तराई केंद्रीय वन प्रभाग में खैर की तस्करी का मामला सामने आने के बाद अब तराई पूर्वी वन प्रभाग में शीशम और सिरस की चिरान से भरा कैंटर पकड़े जाने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगने लगे हैं।

किच्छा-लालकुआं नेशनल हाईवे पर शांतिपुरी वन बैरियर के पास रविवार सुबह वन विभाग की टीम ने UP15FT5016 नंबर का कैंटर पकड़ा। कैंटर में शीशम और सिरस की चिरान लदी थी। वन कर्मियों को देखते ही चालक वाहन छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। जांच के दौरान लकड़ी के परिवहन से संबंधित कोई वैध वन प्रपत्र भी नहीं मिला।

एक ओर वन विभाग लगातार वन संपदा की सुरक्षा और अवैध कटान-तस्करी पर कार्रवाई के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर बेशकीमती लकड़ी से लदे वाहन जंगल और वन क्षेत्रों से निकलकर हाईवे तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वन संपदा की निगरानी के बावजूद इतनी मात्रा में चिरान लेकर वाहन वन क्षेत्रों से बाहर कैसे निकल रहे हैं?

तराई केंद्रीय वन प्रभाग में खैर तस्करी का मामला अभी चर्चा में है और अब तराई पूर्वी वन प्रभाग में शीशम-सिरस की चिरान बरामद होने से वन अपराधों की तस्वीर को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि बरामद लकड़ी कहां से आई, इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।

वन विभाग ने कैंटर को सीज कर डौली रेंज में सुरक्षित खड़ा करा दिया है। अब जांच की दिशा कैंटर चालक से आगे बढ़कर लकड़ी के स्रोत, वाहन मालिक और पूरे परिवहन नेटवर्क तक पहुंचती है या कार्रवाई केवल वाहन सीज करने तक सीमित रहती है, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।

वन विभाग का कहना है कि अवैध वन संपदा के दोहन और परिवहन के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। अब देखना यह है कि इस कैंटर की लकड़ी की जांच से सिर्फ एक वाहन का मामला सामने आता है या तराई के जंगलों से चल रहे किसी बड़े नेटवर्क की कड़ियां भी जुड़ती हैं।