








नेपाल से आत्मीय रिश्ते निभाएगा भारत, राजनाथ बोले- सुख-दुख के साथी हैं, हर संकट में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे!
भीषण बाढ़ में 930 लोगों की मौत, 4,250 अब भी लापता; खोज, बचाव और पुनर्वास में भारत देगा हरसंभव सहयोग!
नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 930 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,250 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में भारत ने नेपाल के साथ अपने आत्मीय और मित्रवत रिश्तों को मजबूती से निभाने का भरोसा दिया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास पहुंचे और शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भारत सरकार और देश की जनता की ओर से नेपाल की जनता एवं सरकार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि भारत इस मुश्किल समय में अपने नेपाली भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे आत्मीय रिश्ते हैं। भारत नेपाल का करीबी मित्र, साझेदार और सुख-दुख का साथी रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कठिन घड़ी में भी भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास के प्रयासों में हरसंभव सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार सोमवार तक बाढ़ से संबंधित घटनाओं में 930 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। चितवन से 272, नवलपरासी पूर्व से 207, नवलपरासी पश्चिम से 151 और गोरखा से 62 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 95, धादिंग से 55, तनहूं से 37 और रसुवा से 24 शव मिले हैं।
अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों में 99 सुरक्षाकर्मी और 591 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोगों के अभी तक लापता होने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
बर्फ और चट्टानों के खिसकने से अचानक आई बाढ़
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने अथवा हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। 26 अगस्त को आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहरों एवं गांवों में भारी तबाही मचाई।
इस त्रासदी के बीच भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि नेपाल के साथ उसके रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे आत्मीय और मानवीय हैं। संकट की इस घड़ी में भारत खोज और बचाव से लेकर पुनर्वास तक नेपाल की हरसंभव मदद के लिए तैयार है।
दर्पण न्यूज 24/7
