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कोटद्वार के चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश!
दर्ज प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर रोक, उत्तराखंड सरकार समेत अन्य से मांगा जवाब, हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक!
नई दिल्ली। कोटद्वार के चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने जिम संचालक दीपक कुमार को बड़ी अंतरिम राहत दी है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही उत्तराखंड सरकार समेत अन्य पक्षों से जवाब मांगा गया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी, जिसे दीपक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
वायरल वीडियो से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था मामला!
कोटद्वार में जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान का नाम ‘बाबा’ रखे जाने को लेकर कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद विवाद हुआ था। इसी दौरान दीपक कुमार भीड़ का सामना करते नजर आए थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उनसे नाम पूछे जाने पर उन्होंने कथित तौर पर कहा था—“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”
वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया और दीपक की ओर से पुलिस सुरक्षा तथा कथित पुलिस पक्षपात के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका!
दीपक ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपने और अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने कथित नफरत भरे भाषण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा पुलिस अधिकारियों के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये की विभागीय जांच की मांग भी की थी।
हाईकोर्ट ने 20 मार्च को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां नहीं करने का निर्देश भी दिया था, जिससे जनभावनाएं भड़क सकती हों।
सुप्रीम कोर्ट में दर्ज प्राथमिकी पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दीपक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने प्राथमिकी दर्ज किए जाने पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि मदद करने वाले व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की शिकायत कैसे की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए उत्तराखंड सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा तथा दर्ज प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी।
पुलिस ने दर्ज किए थे तीन मुकदमे।
मामले में कोटद्वार पुलिस ने तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें एक मुकदमा प्रदर्शन में शामिल 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ था। उन पर सार्वजनिक शांति भंग करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ कथित हाथापाई के आरोप लगाए गए थे।
वहीं, दीपक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। दीपक ने सुप्रीम कोर्ट में इस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से दीपक कुमार को बड़ी राहत मिली है। अब मामले में उत्तराखंड सरकार समेत अन्य पक्षों के जवाब और अगली सुनवाई पर आगे की कानूनी दिशा तय होगी।