








मां-बाप का साया पांच साल की उम्र में उठा, दादी ने संभाला जीवन… अब बीमारी से जूझ रहे हर्षित के लिए हीरा एंड टीआर चैरिटेबल ट्रस्ट बना सहारा!
25 दिनों से अस्पताल में भर्ती 15 वर्षीय हर्षित आर्य के इलाज को ₹21 हजार की सहायता, ट्रस्ट ने समाज से भी सहयोग की अपील की!
हल्दूचौड़/गोलापार। मां-बाप का साया जब सिर से उठ जाए तो जिंदगी कितनी कठिन हो सकती है, इसका दर्द 15 वर्षीय हर्षित आर्य की कहानी बयां करती है। महज पांच वर्ष की उम्र में माता-पिता को खो चुके हर्षित को उनकी दादी श्रीमती सरस्वती देवी ने अपने आंचल में पाला-पोसा और जिंदगी की मुश्किल राह पर आगे बढ़ाया। लेकिन अब गंभीर बीमारी ने हर्षित और उनकी दादी के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
गोलापार निवासी हर्षित पिछले करीब 25 दिनों से गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं होने के कारण लगातार बढ़ता इलाज का खर्च दादी सरस्वती देवी के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। ऐसे कठिन समय में हीरा एंड टीआर चैरिटेबल ट्रस्ट ने हर्षित के परिवार की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हुए उनकी दादी सरस्वती देवी को ₹21 हजार की सहायता राशि का चेक सौंपा।
ट्रस्ट के संयोजक शुभम अंडोला की ओर से बताया गया कि उन्हें हर्षित की स्थिति और परिवार की आर्थिक परेशानी की जानकारी नवीन आर्य की सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मिली। इसके बाद मित्रों और सहयोगियों से चर्चा कर ट्रस्ट के माध्यम से तत्काल सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया,शुभम ने कहा कि यह सहायता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी सहयोगी मित्रों के विश्वास और सहयोग का परिणाम है, जिन्होंने जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को केवल एक माध्यम मानते हैं और असली श्रेय उन सभी सहयोगियों को जाता है, जिनके सहयोग से किसी जरूरतमंद तक मदद पहुंच पा रही है।
उन्होंने कहा कि हर्षित के इलाज के लिए अभी भी आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। समाज के सक्षम लोगों से अपील की गई कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर्षित की मदद के लिए आगे आएं। सहयोग की राशि छोटी या बड़ी नहीं होती, बल्कि किसी जरूरतमंद के कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना सबसे बड़ी मानवता है।
हीरा एंड टीआर चैरिटेबल ट्रस्ट की यह पहल इस बात का संदेश भी देती है कि समाज में संवेदनशील लोग आगे आएं तो किसी मजबूर परिवार की मुश्किल घड़ी को कुछ आसान बनाया जा सकता है। एक छोटी-सी मदद किसी जरूरतमंद के लिए इलाज की उम्मीद बन सकती है और एक शेयर भी मदद का नया रास्ता खोल सकता है।
हर्षित की जिंदगी इस समय बीमारी से जंग लड़ रही है। दादी सरस्वती देवी अकेले इस संघर्ष को संभाल रही हैं। ऐसे में जरूरत है कि समाज हर्षित के साथ खड़ा हो—क्योंकि कभी-कभी किसी की जिंदगी बचाने के लिए बहुत बड़ी रकम नहीं, बल्कि बहुत से छोटे-छोटे मदद के हाथ चाहिए होते हैं।
हीरा एंड टीआर चैरिटेबल ट्रस्ट की अपील है कि हर्षित की मदद की इस मुहिम को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि सहायता के इच्छुक लोग परिवार तक पहुंच सकें।
