








तीन साल की प्रज्ञा पूछ रही है—क्या मैं फिर से खेल पाऊंगी?
ल्यूकेमिया से जूझ रही मासूम की जिंदगी बचाने के लिए मानवता से मदद की पुकार, आपकी छोटी-सी मदद बन सकती है उसकी सांसों की उम्मीद।
जिस उम्र में हाथों में खिलौने होने चाहिए, आंखों में सपने होने चाहिए और आंगन में मासूम किलकारियां गूंजनी चाहिएं, उस उम्र में तीन साल की नन्ही प्रज्ञा भट्ट अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है।
प्रज्ञा ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। बीमारी ने इस मासूम के बचपन को अस्पताल, दवाइयों, जांच और कीमोथेरेपी के बीच समेट दिया है। उसके माता-पिता के लिए हर दिन एक नई चिंता लेकर आता है—इलाज कैसे जारी रहेगा, अगली दवा का इंतजाम कैसे होगा और बेटी को जिंदगी की इस कठिन लड़ाई से कैसे बाहर निकाला जाएगा।
प्रज्ञा को अभी जिंदगी की शुरुआत करनी है। उसे स्कूल जाना है, दोस्तों के साथ खेलना है, मां की गोद में बेफिक्र होकर सोना है और अपने सपनों की दुनिया बसानी है। लेकिन बीमारी और इलाज का बढ़ता खर्च परिवार की मजबूरियों को लगातार बढ़ा रहा है।
परिवार आर्थिक रूप से सामान्य है और लंबे समय तक चलने वाले महंगे इलाज का खर्च अकेले उठाना उसके लिए बेहद कठिन हो रहा है। कीमोथेरेपी, दवाइयां, जांच और अन्य चिकित्सकीय खर्चों के लिए लगातार आर्थिक सहायता की जरूरत है।
ऐसे वक्त में प्रज्ञा का परिवार किसी चमत्कार का नहीं, मानवता के हाथों का इंतजार कर रहा है।
हो सकता है आपके लिए ₹500, ₹1000 या ₹5000 की मदद बहुत बड़ी रकम न हो, लेकिन प्रज्ञा के लिए यही छोटी-सी मदद उसके इलाज की अगली सीढ़ी बन सकती है। कई लोगों का छोटा-छोटा सहयोग मिलकर उस मासूम के लिए जिंदगी की बड़ी उम्मीद बन सकता है।
आज जरूरत सिर्फ प्रज्ञा के परिवार की नहीं, बल्कि हम सबकी इंसानियत की परीक्षा की है।
आइए, इस मासूम बच्ची को उसकी बीमारी के भरोसे अकेला न छोड़ें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और इस अपील को अपने परिवार, मित्रों, व्हाट्सऐप ग्रुप और सोशल मीडिया तक पहुंचाएं। हो सकता है आपकी एक शेयर किसी ऐसे इंसान तक पहुंच जाए, जो प्रज्ञा के इलाज में बड़ी मदद कर सके।
प्रज्ञा को दया नहीं, जिंदगी का एक मौका चाहिए।
आइए, मिलकर उसे वह मौका दें।
सहयोग के लिए बैंक विवरण
नाम: Bhagwati Devi
खाता संख्या: 4441779878
IFSC: SBIN0RRUTGB
PhonePe: दिए गए QR कोड के माध्यम से
संपर्क/सत्यापन: 8448730861
एक हाथ बढ़ाइए…
शायद आपकी छोटी-सी मदद प्रज्ञा के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाए।
मानवता की पुकार है—नन्ही प्रज्ञा के लिए मदद के हाथ बढ़ाएं।
