

8 लाख की बरामदगी के बाद कार से मिले 5.58 लाख, ‘फ्रीडम फाइटर कोटे’ की जांच में एमबीबीएस कनेक्शन!
देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के कथित फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में रकम के कथित लेनदेन की नई कड़ियां सामने आ रही हैं। पहले आरोपी के मेरठ स्थित घर से 8 लाख रुपये बरामद होने के बाद अब एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी कार से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने इस रकम को कुछ छात्रों को फ्रीडम फाइटर कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर मिलने की बात बताई है।
मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदनों की जांच के दौरान दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज किए।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड कब्जे में लेकर दस्तावेजों की जांच की, जिससे अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया था। रूपेश पंडित की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये बरामद किए गए।
जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने अब धीरज श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, उसकी टाटा नेक्सॉन कार संख्या एमपी-04-वाई-0655 की तलाशी में 5,58,100 रुपये मिले।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में धीरज श्रीवास्तव ने बताया कि बरामद रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के रूप में दी थी। इस दावे की पुष्टि के लिए एसआईटी रकम के स्रोत, लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र कितने अभ्यर्थियों के लिए तैयार किए गए, रकम का लेनदेन किन लोगों के बीच हुआ और एमबीबीएस दाखिले से जुड़ा कथित कमीशन किस स्तर तक पहुंचा।
फिलहाल तीन गिरफ्तारियां और लाखों रुपये की बरामदगी के बाद जांच एक नई दिशा में बढ़ी है। एसआईटी की विवेचना पूरी होने के बाद ही कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
