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कल फिर सीएम का हल्द्वानी दौरा: मंच पर आशाएं, जमीन पर सवाल!

ज्योलीकोट में दूषित पानी से बीमारी और मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, बदहाल सड़कें, अधूरे जल जीवन मिशन और बिजली-पानी की दिक्कतों के बीच जनता पूछ रही—दौरे के बाद क्या बदलेगा?

हल्द्वानी!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को फिर हल्द्वानी पहुंचेंगे। ‘उत्तराखंड की आशाएं और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित जागरण विमर्श में स्वास्थ्य, रोजगार, कारोबार, पर्यटन और नियोजित विकास पर चर्चा होगी। मंच पर उत्तराखंड के भविष्य की बात होगी, लेकिन हल्द्वानी की जनता के सवाल आज की जिंदगी से जुड़े हैं।

सुरक्षित पानी कब मिलेगा? अस्पताल में जरूरत पर बेड मिलेगा या नहीं? अधूरी पेयजल योजनाएं कब पूरी होंगी? बदहाल सड़कें कब सुधरेंगी? बिजली-पानी की दिक्कत कब खत्म होगी? और मुख्यमंत्री के दौरे पर सरकारी खजाने से खर्च होने वाली रकम का हिसाब जनता को कब मिलेगा?

दूषित पेयजल से ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी फैली और सैकड़ों लोग प्रभावित हुए। दो मौतों के बाद मामला गंभीर हुआ। अब एक और युवक की मौत के मामले में परिजनों ने अस्पताल में बेड नहीं मिलने का आरोप लगाया है। आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है, लेकिन घटना ने पेयजल और स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सरकार ने पेयजल व्यवस्था से जुड़े छह इंजीनियरों को निलंबित किया। हाईकोर्ट ने भी अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख अपनाया। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और सैंपलिंग बढ़ानी पड़ी।

हल्द्वानी पर पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। मरीज के लिए अस्पताल की इमारत से ज्यादा जरूरी है डॉक्टर, जांच, दवा और समय पर बेड।

बेस अस्पताल की करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नई इमारत चार साल से उपयोग में नहीं आ सकी। ऐसे में सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं, सरकारी निवेश के उपयोग का भी है।

जल जीवन मिशन के तहत नल पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन जनता पूछ रही है, नल में पानी नियमित और सुरक्षित कब आएगा?

बदहाल सड़क भी सरकारी फाइल का काम नहीं, जनता की रोज की परेशानी है। मरीज के लिए अस्पताल का रास्ता, किसान के लिए बाजार और बच्चों के लिए स्कूल की राह। बिजली की कटौती और कम वोल्टेज भी घरों और कारोबार को प्रभावित करते हैं।

तेजी से फैलते हल्द्वानी में सड़क, पानी, बिजली, सीवर और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी उसी रफ्तार से होना जरूरी है। शुक्रवार के विमर्श में ‘नियोजित विकास बनाम अनियोजित विकास’ पर चर्चा होगी। शहर का मौजूदा विस्तार इस बहस का जमीन से जुड़ा सवाल है।

मुख्यमंत्री के दौरे पर सुरक्षा, यातायात, मंच, सरकारी मशीनरी, साफ-सफाई, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं पर कितना सार्वजनिक धन खर्च होगा? जनता यह जानना चाहती है।

यह सवाल दौरे के विरोध का नहीं, सरकारी खर्च की पारदर्शिता का है। जनता की गाढ़ी कमाई से होने वाले आयोजन पर कितना खर्च हुआ और उससे जनहित में क्या हासिल हुआ—इसका ब्योरा सार्वजनिक होना चाहिए।

जनता किसी चमत्कार की मांग नहीं कर रही। उसे सुरक्षित पानी, अस्पताल में इलाज और बेड, बेहतर सड़क, पूरी पेयजल योजनाएं और भरोसेमंद बिजली-पानी चाहिए।

शुक्रवार को मंच पर उत्तराखंड की आशाओं और चुनौतियों पर चर्चा होगी। हल्द्वानी का सवाल सीधा है आशाएं बहुत हैं, अब बदलाव कब दिखाई देगा?

मुख्यमंत्री का दौरा खत्म होने और हेलीकॉप्टर के उड़ने के बाद ही इसकी असली परीक्षा होगी। ज्योलीकोट में सुरक्षित पानी, अस्पताल में उपलब्ध बेड, सुधरी सड़कें और पूरी हुई पेयजल योजनाएं ही बताएंगी कि मंच पर हुआ विमर्श जमीन तक कितना पहुंचा।

जनता अब आश्वासन नहीं, अपनी जिंदगी में बदलाव देखना चाहती है।

उत्तराखंड