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बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग फिर आंदोलन की राह पर, सड़क-बिजली-पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल, टिकट के दावेदारों की सक्रियता ने बढ़ाई सियासी हलचल!
लालकुआं। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ लालकुआं की सियासत में हलचल तेज होने लगी है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता और क्षेत्रीय मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन फिर जोर पकड़ रहा है। वहीं सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी स्थानीय समस्याएं भी चर्चा में हैं। इन परिस्थितियों के बीच भाजपा के भीतर टिकट को लेकर संभावित दावेदारों की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। इस मांग को लेकर आंदोलन से जुड़े लोगों ने एक बार फिर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए आंदोलनकारी शासन से राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन उनकी मांग का अंतिम समाधान अभी बाकी है। यह उनका पक्ष है, जबकि इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन का आधिकारिक रुख चुनावी बहस में महत्वपूर्ण रहेगा।
क्षेत्र की अन्य समस्याएं भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि कई स्थानों पर सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है और जगह-जगह गड्ढों के कारण आवागमन प्रभावित होता है। कुछ इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या बताई जा रही है। पेयजल और सिंचाई से जुड़ी दिक्कतों को लेकर भी ग्रामीण अपनी समस्याएं सामने रखते रहे हैं। इन शिकायतों की स्थिति और उनके समाधान को लेकर संबंधित विभागों के आधिकारिक आंकड़े तथा दावे अलग तस्वीर पेश कर सकते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी स्थानीय स्तर पर अपेक्षाएं हैं। हल्दूचौड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों, विशेषज्ञ सेवाओं और जांच सुविधाओं को लेकर लोगों की मांगें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की आबादी के लिहाज से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध सुविधाओं और किए जा रहे प्रयासों का आधिकारिक पक्ष इस बहस का दूसरा पहलू है।
यही मुद्दे अब चुनावी राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विपक्ष इन्हें सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि के कामकाज पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है, जबकि सत्तापक्ष अपने स्तर पर किए गए विकास कार्यों और योजनाओं को सामने रख सकता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव तक कौन से मुद्दे जनता की प्राथमिकता में बने रहते हैं।
इसी बीच भाजपा में संभावित टिकट दावेदारों की सक्रियता ने लालकुआं की राजनीति में एक अलग बहस छेड़ दी है। मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के अलावा पूर्व विधायक नवीन चंद्र दुम्का समेत अन्य नामों की चर्चा स्थानीय राजनीतिक हलकों में है। दीपेंद्र कोश्यारी की सक्रियता को भी संभावित राजनीतिक दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से अभी किसी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
लालकुआं के पिछले चुनावी परिणाम इस चर्चा को और रोचक बनाते हैं। 2012 में निर्दलीय हरीश चंद्र दुर्गापाल ने जीत दर्ज की थी। 2017 में भाजपा के नवीन चंद्र दुम्का विजयी रहे, जबकि 2022 में भाजपा ने डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह पिछले तीन विधानसभा चुनावों में विजेता चेहरा अलग रहा है।
हालांकि इस आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि लालकुआं में कोई विधायक लगातार दूसरी बार जीत ही नहीं सकता। 2022 में नवीन चंद्र दुम्का प्रत्याशी नहीं थे। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों से केवल इतना कहा जा सकता है कि पिछले तीन चुनावों में विजेता प्रत्याशी अलग-अलग रहे हैं। अब 2027 में यदि मौजूदा विधायक को दोबारा टिकट मिलता है तो उनके सामने इस चुनावी पैटर्न को बदलने की चुनौती होगी। यदि भाजपा टिकट में बदलाव करती है तो लालकुआं का पुराना चुनावी पैटर्न फिर राजनीतिक चर्चा में आ सकता है।
इस बीच स्थानीय मुद्दों और टिकट की राजनीति का आपस में जुड़ना तय माना जा रहा है। दावेदारों के लिए जहां संगठन और जनसंपर्क महत्वपूर्ण होंगे, वहीं जनता के लिए स्थानीय समस्याओं का समाधान और पिछले कार्यकाल का मूल्यांकन अहम मुद्दा हो सकता है।
फिलहाल लालकुआं में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। टिकट घोषित नहीं हुए हैं, विपक्ष की रणनीति सामने नहीं आई है और चुनावी गठजोड़ को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि बिंदुखत्ता का राजस्व ग्राम आंदोलन, बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल और टिकट की बढ़ती दावेदारी ने 2027 की सियासत की जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है।
अब चुनावी तस्वीर किस दिशा में जाती है, यह आने वाले महीनों में होने वाले राजनीतिक फैसलों और जनता के रुख पर निर्भर करेगा। लालकुआं के सामने इस बार दो समानांतर सवाल हैं—क्या स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस का केंद्र बनेंगे और क्या पिछले चुनावों में दिखाई दिया चेहरा बदलने का सिलसिला 2027 में भी जारी रहेगा?

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