

“ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के…”—जनगीत के बीच तहसील परिसर में गूंजा बिंदुखत्ता का आंदोलन
राजस्व ग्राम की अधिसूचना और गौला पर स्थायी तटबंध की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, जनगीतों ने आंदोलन में भरा जोश।
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। “ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के…” जनगीत की गूंज और आंदोलनकारियों के जोशीले नारों के बीच सोमवार को तहसील लालकुआं परिसर बिंदुखत्ता की मांगों का केंद्र बन गया। राजस्व ग्राम की अधिसूचना और गौला नदी किनारे स्थायी तटबंध निर्माण की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है।
तहसील परिसर में जुटे बिंदुखत्तावासियों ने साफ संदेश दिया कि वर्षों से चली आ रही मांग अब सिर्फ ज्ञापनों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहेगी। जनगीतों के बीच आंदोलनकारियों ने सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम की अधिसूचना देने और गौला कटाव से स्थायी सुरक्षा के लिए तटबंध निर्माण का काम शुरू कराने की मांग उठाई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि 32 गांवों के 11,703 दावेदारों का सामूहिक दावा 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। इसके बावजूद अधिसूचना जारी नहीं होने से लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
27 सितंबर की महारैली के बाद सरकार से मिले आश्वासन के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने पर अब बिंदुखत्तावासी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि अब आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए और सर्वे नहीं, गौला पर स्थायी तटबंध चाहिए।
तहसील परिसर में चल रहे धरने में वन अधिकार संगठन के साथ पूर्व सैनिक, राज्य आंदोलनकारी और बिंदुखत्ता के ग्रामीण शामिल हैं। जनगीतों और नारों के बीच आंदोलनकारियों का कहना है कि मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

