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एसआईआर पर सुमित-भगत आमने-सामने, वोट की लड़ाई पर सियासत गरम।

सुमित बोले—वोट की ताकत से खिलवाड़ लोकतंत्र पर सीधा हमला, भगत का पलटवार—हार की हताशा में आयोग पर सवाल उठा रही कांग्रेस।

दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता।

हल्द्वानी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर हल्द्वानी की सियासत में अब सीधा वाक्युद्ध छिड़ गया है। एक ओर कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लोकतंत्र और मताधिकार का सवाल बताते हुए ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर कालाढूंगी विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत ने कांग्रेस के विरोध को चुनावी पराजय की हताशा करार देते हुए दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज कराने की चुनौती दी है।

सुमित हृदयेश ने कहा कि जनता के वोट की ताकत से खिलवाड़ लोकतंत्र पर सीधा हमला है। पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटना या चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मताधिकार से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, इसलिए निर्वाचन आयोग को इन सवालों का स्पष्ट, तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं और इसके चलते लोकतंत्र, संविधान तथा मतदाता अधिकारों को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ी है। कांग्रेस का कहना है कि विभिन्न राज्यों के चुनाव परिणामों और जमीनी परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल गंभीरता से उठाए जा रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार से हल्द्वानी में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ जनजागरण मार्च निकालने का ऐलान किया है। बुद्ध पार्क तिकोनिया से प्रस्तावित मार्च के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ता वार्ड और बूथ स्तर तक पहुंचकर मतदाताओं को जागरूक करने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस मेयर प्रत्याशी ललित जोशी ने भी मतदाताओं से सूची की जांच करने और पात्र सदस्यों के नाम सुनिश्चित करने की अपील की।

लेकिन कांग्रेस के इस अभियान पर भाजपा ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने कांग्रेस के विरोध को हताशा की राजनीति बताया। उनका कहना है कि एसआईआर किसी राजनीतिक दल की बनाई व्यवस्था नहीं, बल्कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने के साथ मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहराव वाले नामों को हटाना है।

भगत ने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि यदि एसआईआर को लेकर आपत्ति है तो नारेबाजी के बजाय प्रमाण और दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखी जाए। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं बताया।

भाजपा विधायक ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस निर्वाचन व्यवस्था के जरिए कांग्रेस कई राज्यों में चुनाव जीत चुकी है, उसी व्यवस्था पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक जब परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो वही चुनाव लोकतंत्र की जीत नजर आते हैं, लेकिन भाजपा के पक्ष में जनादेश आने पर ईवीएम, निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची में खामियां दिखाई देने लगती हैं।

भगत ने एसआईआर की वैधता पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए घेरा और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भीड़ के सहारे लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

इस तरह एसआईआर अब महज मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। हल्द्वानी में इसके बहाने कांग्रेस लोकतांत्रिक अधिकार और वोट की सुरक्षा का सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इसे चुनावी हार की हताशा में खड़ा किया गया राजनीतिक विवाद बता रही है। एक तरफ सड़क पर उतरकर मतदाताओं को लामबंद करने की तैयारी है तो दूसरी तरफ भाजपा कांग्रेस से आरोपों के बजाय प्रमाण सामने रखने की मांग कर रही है।

अब असली सवाल यही है कि एसआईआर को लेकर उठ रहे सवाल दस्तावेजों और तथ्यों की मेज पर तय होंगे या आरोप-प्रत्यारोप की सियासी गर्मी में? फिलहाल हल्द्वानी में सुमित हृदयेश और बंशीधर भगत के बीच छिड़ा यह वाक्युद्ध आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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