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अमित बनकर हिंदू युवती के घर रह रहा था अजीम, ग्रामीणों ने पकड़ा।

आधार कार्ड में सामने आई अलग पहचान, कोतवाली पहुंचे दर्जनों ग्रामीण; तहरीर नहीं मिलने पर पुलिस एक्ट में चालान।

लालकुआं। बिंदुखत्ता के शास्त्री नगर में एक मुस्लिम युवक द्वारा कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर हिंदू नाम से एक परिवार के घर रहने का मामला सामने आने के बाद मंगलवार को क्षेत्र में हलचल मच गई। ग्रामीणों ने युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। देखते ही देखते दर्जनों महिला-पुरुष और हिंदूवादी कार्यकर्ता लालकुआं कोतवाली पहुंच गए और पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों के अनुसार टेंट चौराहा, बिंदुखत्ता निवासी एक परिवार के यहां रुद्रपुर का एक युवक पिछले कुछ समय से आ-जा रहा था और वहीं रह रहा था। ग्रामीणों को मंगलवार को उसके मुस्लिम होने की जानकारी मिली तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर युवक को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान युवक ने अपना नाम अमित बिष्ट बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसके पहचान संबंधी दस्तावेज की जांच की, जिसमें नाम अजीम खान पुत्र नन्हे खान, निवासी रुद्रपुर दर्ज होने की बात सामने आई।

मामला सामने आते ही ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस युवक को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई। उधर, घटना की जानकारी फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण कोतवाली पहुंच गए। ग्रामीणों ने युवक के साथ ही उसे अपने घर में रखने वाले परिवार की भूमिका की भी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

मामले के बीच संबंधित परिवार ने ग्रामीणों से माफी मांगते हुए भविष्य में उक्त युवक से किसी तरह का संबंध नहीं रखने का भरोसा दिलाया। हालांकि पूरे घटनाक्रम में किसकी भूमिका क्या रही और युवक वास्तव में किस उद्देश्य से परिवार के संपर्क में था, यह पुलिस जांच का विषय है।

पुलिस के अनुसार, मामले में किसी पक्ष की ओर से कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई। इसके बाद युवक का पुलिस एक्ट के तहत चालान किया गया।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन सिंह राणा ने बताया कि बिंदुखत्ता की एक युवती से दोस्ती के बहाने एक मुस्लिम युवक के बार-बार उसके घर आने की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी। पुलिस युवक को पकड़कर कोतवाली लाई, लेकिन किसी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं मिलने पर उसका पुलिस एक्ट में चालान किया गया।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि किसी व्यक्ति की पहचान को लेकर संदेह पैदा होने पर भीड़ के स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय उसकी वास्तविकता की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के तहत ही क्यों न की जाए। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपनी पहचान छिपाकर किसी परिवार के संपर्क में आता-जाता है तो ऐसे मामलों में परिवारों को भी सतर्क रहने और बिना सत्यापन किसी अजनबी पर भरोसा न करने की जरूरत है।

मामले में फिलहाल पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है। युवक द्वारा कथित तौर पर पहचान छिपाने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, यह स्पष्ट नहीं है और इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

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