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दिल्ली के प्रतिष्ठित मंच पर छाई उत्तराखंड की लेखिका, ‘अदम्या-असीम की ओर’ ने छेड़ी साहित्यिक बहस!

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जुटे नामचीन साहित्यकार और पत्रकार, महेश दर्पण बोले– अच्छा साहित्य वही है जो पाठकों को चौंका दे!

नई दिल्ली। उत्तराखंड की लेखिका डॉ. कविता पांडेय की पुस्तक ‘अदम्या-असीम की ओर’ ने देश की राजधानी में साहित्यिक विमर्श का केंद्र बनकर ध्यान खींचा। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित परिचर्चा में नामचीन साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने शब्दों की ताकत, कहानी कहने की कला और साहित्य के सामाजिक सरोकारों पर खुलकर विचार रखे।

चर्चा के दौरान वरिष्ठ लेखक महेश दर्पण ने कहा कि अच्छा साहित्य वह है, जो पाठकों को चौंकाता है। वहीं सिद्धेश्वर सिंह ने आदिवासी महिलाओं के लिए संचालित सरकारी योजनाओं और उन्हें जमीनी स्तर पर लाभ नहीं मिल पाने का मुद्दा उठाया।

परिचर्चा में शिक्षाविद् वी.एन. राय, वरिष्ठ खेल पत्रकार जी. राजारमण, लेखक महेश दर्पण, लेखिका विजयश्री तनवीर और राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार संजय पांडेय सहित प्रवीण शेखर, डॉ. शिशिर सोमवंशी और चित्रा पंत ने सहभागिता की।

वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और यथार्थ को सामने लाने का माध्यम है। प्रभावशाली कहानी वही है, जो पाठक को केवल पढ़ने तक सीमित न रखे, बल्कि उसे सोचने और सवाल उठाने के लिए भी प्रेरित करे।

डॉ. कविता पांडेय की पुस्तक पर हुआ यह विमर्श उत्तराखंड की साहित्यिक रचनात्मकता को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने के साथ ही साहित्य की सामाजिक भूमिका को भी रेखांकित कर गया।

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