इस बड़े ब्रांड के दूध पर खाद्य सुरक्षा विभाग का शिकंजा! मदर डेयरी का गाय का दूध जांच में अधोमानक, 4% फैट का दावा निकला खोखला!
पैकेट पर चार प्रतिशत फैट, प्रयोगशाला में महज 2.9 प्रतिशत मिला; केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद विभाग ने शुरू की विधिक कार्रवाई, इधर लालकुआं में मिठाइयों की दुकानों पर भी छापेमारी!
हल्द्वानी/लालकुआं। त्योहारों में मिठाइयों की मिठास के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घर-घर में पहचाने जाने वाले प्रतिष्ठित ब्रांड मदर डेयरी के पैक्ड गाय के दूध का नमूना खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा। पैकेट पर चार प्रतिशत फैट होने का दावा किया गया था, लेकिन केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला की जांच में दूध के भीतर फैट की मात्रा महज 2.9 प्रतिशत मिली। यानी लेबल पर किए गए दावे और प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
मामले ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीज पर उपभोक्ता ब्रांड के नाम और पैकिंग के भरोसे खरीदारी करते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब प्रतिष्ठित ब्रांड के उत्पाद की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं तो आम उपभोक्ता आखिर किस पर भरोसा करे?
अगस्त में लिया गया था नमूना, केंद्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खुली पोल!
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अगस्त में हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र के भोलानाथ गार्डन स्थित मदर डेयरी के वितरक से पैक्ड गाय के दूध का नमूना लिया था। शुरुआती जांच राजकीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, रुद्रपुर में कराई गई। नमूना अधोमानक पाए जाने के बाद अपील पर इसे केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला, गाजियाबाद भेजा गया।
21 अक्टूबर को जारी केंद्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट में दूध में फैट की मात्रा 2.9 प्रतिशत पाई गई, जबकि इस उत्पाद के लेबल पर न्यूनतम चार प्रतिशत फैट दर्शाया गया था। निर्धारित न्यूनतम मानक 3.2 प्रतिशत से भी फैट की मात्रा कम मिली। रिपोर्ट के आधार पर उत्पाद को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत अधोमानक और मिथ्याछाप घोषित किया गया है। विभाग ने मामले में नियमानुसार विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
लालकुआं में मिठाई की दुकानों पर छापा, पांच नमूने लिए!
उधर, दीपावली के मद्देनजर लालकुआं में भी प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने मुख्य बाजार और गौला रोड क्षेत्र में करीब एक दर्जन खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बेसन के लड्डू, बालूशाही, मिल्क लॉज और तिल-खोया लड्डू समेत विभिन्न मिठाइयों के पांच नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए।
टीम की कार्रवाई से मिठाई कारोबारियों में हलचल रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दो दर्जन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 21 से लिए 14 नमूने!
खाद्य सुरक्षा विभाग ने रामनगर, हल्द्वानी नगर निगम और लालकुआं के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान चलाया। इस दौरान करीब दो दर्जन खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। 21 प्रतिष्ठानों से गुड़, गुलाब जामुन, आटे के लड्डू, खिलौना मिठाई, पेड़ा, बेसन के लड्डू, बालूशाही और तिल-खोया लड्डू समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के 14 नमूने एकत्र किए गए।
कार्रवाई में तहसीलदार लालकुआं ईश्वर सिंह भीमा, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा अजय सिंह रावत, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी नंदकिशोर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय कुमार सिंह समेत विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
सबसे बड़ा सवाल: ब्रांड के भरोसे खरीदे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी?
मदर डेयरी के दूध की जांच रिपोर्ट ने खाद्य कारोबार में गुणवत्ता नियंत्रण और पैकेट पर किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, एक नमूने की रिपोर्ट के आधार पर पूरे ब्रांड के सभी उत्पादों की गुणवत्ता पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन यह मामला निश्चित रूप से खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों से लेकर दूध, खोया और अन्य खाद्य पदार्थों तक की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में सिर्फ छापेमारी और नमूने लेने तक अभियान सीमित नहीं रहना चाहिए। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई और उपभोक्ताओं को उसकी जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है।
सवाल साफ है—उपभोक्ता कीमत पूरी चुकाए, पैकेट पर लिखे दावे पर भरोसा करे, लेकिन उत्पाद की गुणवत्ता की गारंटी आखिर कौन देगा?

