प्रदेश की जमीन नहीं, कांग्रेस को अपनी सियासी जमीन की चिंता : डब्बू
मंडी परिषद अध्यक्ष ने भूमि बचाओ यात्रा पर उठाए सवाल, कांग्रेस सरकारों पर लगाए भूमि घोटालों और भूमाफिया को संरक्षण देने के आरोप; धामी सरकार के भू-कानून और अतिक्रमण हटाओ अभियान को बताया अहम कदम!
हल्द्वानी। उत्तराखंड में भूमि और भू-कानून का मुद्दा अब सियासी टकराव का नया मैदान बनता जा रहा है। कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा पर पलटवार करते हुए उत्तराखंड मंडी परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल कपूर डब्बू ने सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर प्रदेश की जमीन बचाने निकली है या अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन तलाश रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में भूमाफिया संस्कृति को बढ़ावा देने और भूमि संबंधी अनियमितताओं को संरक्षण देने का काम कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में हुआ। डब्बू ने कहा कि आज भाजपा सरकार के भू-कानून और अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए।
रामपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. डब्बू ने कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा को राजनीतिक कवायद करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से ही जमीनों की खरीद-फरोख्त और आवंटन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कांग्रेस सरकारों के दौरान चार दर्जन से अधिक भूमि घोटालों के आरोप लगे। उन्होंने अल्मोड़ा के नैनीसार में एक समूह से जुड़े एजुकेशनल ट्रस्ट को करीब सात हेक्टेयर यानी 17 एकड़ से अधिक जमीन आवंटित किए जाने का मामला उठाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था और न्यायालय की शरण तक लेनी पड़ी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उस समय शिक्षा और पर्यटन में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आवंटन को उचित ठहराया था।
डब्बू ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस की सरकार निवेश के नाम पर भूमि आवंटन को सही ठहरा रही थी, तब उसे स्थानीय लोगों की आपत्तियां क्यों नहीं दिखाई दीं? आज भाजपा सरकार के समय निवेश संबंधी प्रस्तावों पर सवाल उठाना कांग्रेस के दोहरे रवैये को दर्शाता है।
सरकारी संपत्तियों पर निवेश का मुद्दा भी गरमाया!
पटवाडांगर, एचएमटी रानीबाग, रामगढ़, डाकपत्थर और अलकनंदा होटल से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए डब्बू ने कहा कि इन संपत्तियों के भूमि उपयोग, पुनर्विकास और पर्यटन निवेश की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय विवरण के अनुसार फिलहाल इन स्थानों पर कोई परियोजना क्रियान्वित नहीं हो रही है। प्रस्ताव, अध्ययन और अंतिम स्वीकृति के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों को लेकर किसी भी निर्णय में पारदर्शिता, जनहित, पर्यावरण संरक्षण और राज्य के आर्थिक हित सर्वोपरि होने चाहिए।
भू-कानून और अतिक्रमण पर कांग्रेस को घेरा!
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के भू-कानून को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मंडी परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने जमीनों की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगाने के लिए नए प्रावधान किए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के कार्यकाल में लाए गए भू-कानून का भी उल्लेख किया।
वहीं, दर्जा मंत्री सुरेश भट्ट ने धार्मिक गतिविधियों की आड़ में कथित रूप से कब्जाई गई 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने हल्द्वानी के वनभूलपुरा में रेलवे की करीब 80 एकड़ भूमि के मामले को भी उठाते हुए कहा कि सरकार इसे लेकर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही है।
औद्योगिक पैकेज से लेकर पलायन तक कांग्रेस पर निशाना!
डब्बू ने कांग्रेस पर उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उत्तराखंड को औद्योगिक पैकेज दिया था, लेकिन मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में इसे बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहाड़ों में निवेश, रोजगार, पर्यटन और कृषि के नए अवसर विकसित कर पलायन रोकने की दिशा में काम कर रही है, जबकि कांग्रेस विकास संबंधी प्रयासों पर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने में जुटी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहे जितनी यात्राएं और नारेबाजी कर ले, भाजपा सरकार का संकल्प उत्तराखंड की जमीन की सुरक्षा और प्रदेश के हितों की रक्षा करना है। डब्बू ने आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में प्रदेश में तीसरी बार भाजपा सरकार बनने का भरोसा भी जताया।
पत्रकार वार्ता में दर्जा मंत्री हुकुम सिंह कुंवर, नवीन वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता सुरेश तिवारी, भुवन जोशी और मनोज पाठक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

