








ज्योलिकोट में बीमारी से जंग के बीच सिस्टम पर भी शिकंजा!
स्वास्थ्य जांच से लेकर जलापूर्ति नेटवर्क की मैपिंग तक निगरानी तेज, मुख्य सचिव ने कहा—जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में तय होगी जिम्मेदारी!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो!
देहरादून/नैनीताल। ज्योलिकोट में दूषित पेयजल से उपजे स्वास्थ्य संकट के बीच सरकार ने अब उपचार और राहत के साथ-साथ उस सिस्टम की निगरानी भी तेज कर दी है, जिसके जरिए पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं समय पर सामने आनी चाहिए थीं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मामले की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और साफ किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर नहीं मिलना गंभीर विषय है। उन्होंने शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ट्यूबवेल ऑपरेटर समेत फील्ड स्तर के कार्मिकों के नेटवर्क को प्रभावी सूचना एवं फीडबैक सिस्टम से जोड़ने के निर्देश दिए। उद्देश्य यह है कि भविष्य में पेयजल की गुणवत्ता या स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आते ही उसकी सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचे।
15 दिन में प्रदेशभर की प्रमुख जल योजनाओं का सत्यापन!
मुख्य सचिव ने प्रदेश की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का अगले 15 दिनों में भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें पानी के स्रोत से लेकर स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता स्तर तक संभावित लीकेज की जांच होगी। स्टोरेज टैंकों की सफाई, क्लोरीनेशन, क्लोरीन की उपलब्धता व उपयोग तथा पानी में कॉलीफॉर्म समेत आवश्यक मानकों की जांच और रिकॉर्ड भी नियमित रखने को कहा गया है।
पेयजल और सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट को विशेष रूप से चिन्हित करने तथा पुराने पाइपों के आवश्यकतानुसार प्रतिस्थापन के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही दोनों नेटवर्क की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार कर उसके कड़ाई से अनुपालन पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि यदि एसओपी पहले से लागू होने के बावजूद दूषित पानी की स्थिति सामने आती है तो यह देखा जाना चाहिए कि उसका पालन किस स्तर पर नहीं हुआ।
इधर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी!
दूसरी ओर ज्योलिकोट के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जांच और जागरूकता अभियान जारी रखा है। बुधवार को चोपड़ा में 24, ज्योली में 14 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलिकोट में 27 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आवश्यकतानुसार दवाइयां वितरित की गईं। 20 ब्लड टेस्ट किए गए, 93 लोगों की काउंसलिंग हुई और दो लोगों को उपचार के लिए भर्ती कराया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर और निगरानी गतिविधियां लगातार जारी रखने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र के विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इनमें सुरक्षित पेयजल, हाथों और भोजन की स्वच्छता, जलजनित रोगों के लक्षण तथा समय पर चिकित्सा परामर्श लेने के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
सर्विलांस से रेफरल तक हर स्तर पर रिपोर्टिंग!
सीएमओ ने जिला सर्विलांस अधिकारी और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी भीमताल को सर्विलांस, सैंपलिंग, जांच, उपचार और रेफरल की गतिविधियों की नियमित एवं समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता के अनुसार टेली-मॉनिटरिंग और टेली-कंसल्टेंसी जारी रखने तथा गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से डेंगू, मलेरिया और एच1एन1 से बचाव के लिए भी सावधानी बरतने की अपील की है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, सुरक्षित पानी पीने तथा भोजन और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने को कहा गया है। बुखार, उल्टी-दस्त, पीलापन, बदन दर्द, तेज सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई है।
अब सवाल सिर्फ मरीजों के इलाज का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जवाबदेही का भी है जिसने दूषित पानी की सूचना समय रहते ऊपर तक पहुंचाने में भूमिका नहीं निभाई। सरकार ने निगरानी का दायरा ज्योलिकोट से बढ़ाकर प्रदेश की प्रमुख जल योजनाओं तक कर दिया है। आने वाले 15 दिन इस बात की परीक्षा होंगे कि जांच, मैपिंग और एसओपी के निर्देश कागज से निकलकर जमीन पर कितने उतरते हैं।
