

हर ग्राम पंचायत में बनेगा मुख्यमंत्री खेल क्लब, पीआरडी जवानों का भी बढ़ेगा मानदेय!
धामी सरकार का युवाओं और खिलाड़ियों को बड़ा तोहफा, गांवों में खेल प्रतिभाओं को मिलेगा मंच, चैंपियनशिप ट्रॉफी की पुरस्कार राशि भी बढ़ेगी!
देहरादून। उत्तराखंड के गांवों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए धामी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। अब प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में मुख्यमंत्री खेल क्लब का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर देहरादून के पवेलियन ग्राउंड में आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा को ग्रामीण स्तर पर खेल संस्कृति विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे गांवों के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिलने की उम्मीद है। हालांकि, खेल क्लबों के गठन, बजट और संचालन की विस्तृत रूपरेखा सामने आना अभी बाकी है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों के मानदेय में वृद्धि की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। यानी मानदेय बढ़ाने का ऐलान तो हुआ है, लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी के लिए अब निर्णय और आदेश का इंतजार रहेगा।
मुख्यमंत्री ने आमवाला स्थित युवा केंद्र से लगी खाली भूमि युवा कल्याण विभाग को हस्तांतरित कर वहां मिनी स्टेडियम और अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र बनाने की घोषणा भी की। इससे स्थानीय युवाओं को खेल सुविधाओं के साथ सेना में भर्ती की तैयारी का अवसर मिलने की उम्मीद है।
खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि बढ़ाई जाएगी। न्याय पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कारों में वृद्धि की गई है। राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार 1,500 से बढ़ाकर 2,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 1,000 से बढ़ाकर 1,500 रुपये और तृतीय पुरस्कार 700 से बढ़ाकर 1,000 रुपये करने की घोषणा की गई।
वहीं, चैंपियनशिप ट्रॉफी में ओवरऑल विजेता जनपद को मिलने वाली मुख्यमंत्री कप की पुरस्कार राशि पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दी गई है। वर्तमान में आयोजित 32 खेल प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाकर 50 की जाएगी। इनमें पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया जाएगा।
घोषणाओं के बाद अब अमल की बारी
मुख्यमंत्री की घोषणाओं से गांवों के युवाओं, खिलाड़ियों और पीआरडी जवानों में उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन असली परीक्षा इनके धरातल पर उतरने की होगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल क्लब का गठन, उनके लिए संसाधन और नियमित गतिविधियां सुनिश्चित करना सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।
सवाल यह भी है कि गांवों में बनने वाले ये खेल क्लब केवल सरकारी घोषणा बनकर रहेंगे या वास्तव में ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का मजबूत मंच बन पाएंगे? अब निगाहें सरकार के अगले कदम और इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेंगी।
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