खबरें शेयर करें -

बिंदुखत्ता फिर ठगा गया ! कैबिनेट में प्रस्ताव न पहुंचने पर  पर उठे सवाल!
राजस्व ग्राम का सपना फिर अधूरा, जनता बोली — वादों तक सीमित रह गई घोषणा!
दर्पण न्यूज 24/7 संवाद सहयोगी, लालकुआं।
वर्षों से राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने की आस लगाए बैठे बिंदुखत्ता क्षेत्रवासियों को एक बार फिर गहरा झटका लगा है। उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने का प्रस्ताव शामिल ही नहीं हो पाया, जिससे क्षेत्र में निराशा के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
कैबिनेट बैठक से पहले लगातार यह दावा किया जा रहा था कि 25 फरवरी को प्रस्ताव अंतिम रूप से सरकार के सामने रखा जाएगा, लेकिन तय दिन प्रस्ताव का एजेंडे में शामिल न होना स्थानीय जनता के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। सुबह से निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों को शाम तक मायूसी ही हाथ लगी।
जनता में सवाल — आखिर कमी किसकी?
क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने प्रस्ताव से संबंधित पत्रावली में आवश्यक दस्तावेज अधूरे रहने की बात कही है, लेकिन अब यही बयान उनके लिए राजनीतिक असहजता का कारण बनता दिख रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब मामला वर्षों से लंबित था तो दस्तावेज अधूरे कैसे रह गए।
स्थानीय लोगों और आंदोलनकारियों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद ठोस तैयारी नहीं की गई, जिसके कारण बिंदुखत्ता का मामला फिर फाइलों में ही अटक गया।
आंदोलनकारियों में रोष!
राजस्व ग्राम की मांग को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी तहसील लालकुआं पहुंचे और तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। आंदोलनकारियों ने पूर्व जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग उठाई।
राजस्व गांव संघर्ष समिति के संयोजक कुंदन मेहता ने इसे जनता के साथ “विश्वासघात” बताते हुए कहा कि बार-बार परीक्षण के नाम पर मामले को लटकाया जा रहा है। वहीं वरिष्ठ आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
धरना-उपवास तक पहुंचा मामला
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा देहरादून के गांधी पार्क में उपवास एवं धरना कार्यक्रम आयोजित किए जाने से यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी गरमाने लगा है। बिंदुखत्ता से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसमें भागीदारी कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
सवाल अब भी कायम — बिंदुखत्ता की क्या खता?
दशकों से राजस्व ग्राम का दर्जा पाने की प्रतीक्षा कर रहे बिंदुखत्ता के लोगों के मन में अब एक ही सवाल है —
जब आश्वासन बार-बार मिलते रहे तो प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंच ही क्यों नहीं पाया?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द अधिसूचना जारी नहीं हुई तो क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।

उत्तराखंड