








भ्रष्टाचार राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी बाधा, युवाओं को बनना होगा परिवर्तन का वाहक: राज्यपाल गुरमीत सिंह!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि भ्रष्टाचार राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती है और इसे समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को निर्णायक रूप से आगे आना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक देने और लेने वाले—दोनों की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव नहीं है।
राज्यपाल मंगलवार को लोक भवन में सतर्कता अधिष्ठान, उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित ‘‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’’ विषयक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भ्रष्टाचार के कारणों, उसके सामाजिक दुष्प्रभावों तथा निवारण के उपायों पर गहन परिचर्चा की गई।
गोष्ठी में पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सक्रिय सहभागिता की। परिचर्चा के दौरान युवाओं की भूमिका, जन-जागरूकता, पारदर्शी शासन व्यवस्था और तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
राज्यपाल ने विजिलेंस विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजित इस गोष्ठी की सराहना करते हुए कहा कि ई-गवर्नेंस, तकनीक का उपयोग और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) जैसे उपायों से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने भ्रष्टाचार में लिप्त दोषियों के विरुद्ध सजा की दर बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करना अनिवार्य है। भ्रष्टाचार को विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक संकल्प जरूरी है।
राज्यपाल ने उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बीते वर्षों में मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और किसी भी रूप में भ्रष्टाचार को स्वीकार न करने का संकल्प लें।
गोष्ठी में हुई परिचर्चा में श्री जे.एस. पाण्डेय (पूर्व पुलिस महानिदेशक), श्रीमती कुमकुम रानी (सेवानिवृत्त न्यायाधीश), श्री विपिन चंद्रा (पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त), श्री योगेश कुमार देव (सूचना आयुक्त), श्री जे.एस. विर्क (डिप्टी ए.जी./एडवोकेट, उच्च न्यायालय) और श्री डी.एस. मान (चेयरमैन, दून इंटरनेशनल स्कूल) ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, निदेशक सतर्कता वी. मुरुगेशन, डीआईजी सतर्कता प्रहलाद नारायण मीणा, श्री धीरेन्द्र गुंज्याल सहित अन्य अधिकारी एवं विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
