खबरें शेयर करें -

मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री का महाघोटाला उजागर!

उत्तराखंड के 37 शिक्षक जांच घेरे में!

देहरादून।

उत्तर प्रदेश की मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी फर्जी डिग्री–डिप्लोमा का मामला अब उत्तराखंड तक पहुंच गया है। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने पाया है कि यूपी से डीएलएड या बीएलएड करने वाले कई लोग राज्य में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। विभाग ने इस मामले में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

आदेश के अनुसार 19 दिसंबर 2025 को इन शिक्षकों के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों का मिलान उप शिक्षा अधिकारी के सामने कराया जाएगा। विभाग का कहना है कि कई अभ्यर्थियों ने यूपी का स्थायी निवास दिखाकर प्रशिक्षण लिया और उत्तराखंड का निवासी बताकर नौकरी पाई है, जो नियमों का उल्लंघन और तथ्यों को छिपाकर लाभ लेने का मामला है।

यूपी एसटीएफ की जांच में हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी से करीब एक लाख फर्जी डिग्री बनाए जाने का बड़ा खुलासा हुआ था। इनमें से 200 से अधिक लोग सरकारी नौकरी में पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी डिग्री नेटवर्क की पहुंच महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा तक फैली हुई है।

उत्तराखंड में बेसिक शिक्षा विभाग ने 2917 शिक्षकों की पड़ताल की तो पता चला कि कई अभ्यर्थियों ने यूपी से डीएलएड करने के बाद राज्य में नियुक्ति प्राप्त कर ली। इनमें से कुछ शिक्षक मोनाड यूनिवर्सिटी से डीएलएड भी किए हुए मिले। विभाग ने देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, टिहरी, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में तैनात ऐसे 37 शिक्षकों की सूची जारी कर उन्हें दस्तावेज़ सत्यापन के लिए तलब किया है।

टिहरी के जिला शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार ने आदेश में कहा कि कोई भी अभ्यर्थी एक ही समय में दो राज्यों का स्थायी निवासी नहीं हो सकता। यदि किसी का यूपी का स्थायी निवास प्रमाणपत्र सही है, तो उत्तराखंड वाला अवैध होगा, और यदि उत्तराखंड का सही है तो यूपी वाला अमान्य माना जाएगा। ऐसे मामलों में शिक्षकों ने तथ्यों को छिपाकर प्रशिक्षण और नौकरी दोनों पाने का कार्य किया है।

जांच आगे बढ़ने के साथ विभाग में हड़कंप है और दस्तावेजों के मिलान के बाद फर्जी डिग्रीधारियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

उत्तराखंड