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“हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था… प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं ICU पर, सरकार बेखबर!” — हेमवती नन्दन दुर्गापाल का बड़ा हमला।
दर्पण न्यूज 24*7
लालकुआँ—उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार ने प्रदेश सरकार की लापरवाही और कुप्रबंधन को एक बार फिर उजागर कर दिया है। भवाली सेनिटोरियम में मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल का प्रस्ताव 1 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पेश करने के अदालत के निर्देशों ने सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हेमवती नन्दन दुर्गापाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ICU में हैं, और सरकार उन्हें बचाने की जगह आंखें मूंदकर बैठी है।”
दुर्गापाल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश न केवल सरकार की असफलता दिखाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि राज्य के अस्पताल कितने गंभीर संकट में हैं। उन्होंने कहा कि यदि अदालत दखल न दे तो सरकार जनता की जान से ऐसे ही खिलवाड़ करती रहेगी।
उन्होंने बताया कि पहाड़ी जिलों में डॉक्टरों की कमी भयावह स्थिति में पहुंच चुकी है। एम्बुलेंस समय पर नहीं मिलती, और मरीज घंटों तक अस्पतालों में तड़पते रहते हैं। सिटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे तक के लिए मरीजों को बड़े शहरों या महंगे निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
“लालकुआँ का 200 बेड का अस्पताल सफेद हाथी बन चुका है,” दुर्गापाल ने कहा। पहाड़ों के अस्पताल तो लगभग रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं—ना डॉक्टर, ना दवाएं, ना मशीनें। यह सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि पहाड़ों से पलायन का बड़ा कारण भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की मूलभूत जरूरतों—शिक्षा और स्वास्थ्य—को दरकिनार कर अपने पूरे ध्यान को आबकारी और खनन पर केंद्रित कर चुकी है, जिससे सरकार की नीयत साफ दिखाई देती है।
दुर्गापाल ने चेतावनी देते हुए कहा,
“अगर सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार नहीं किया, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

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