








दूषित पानी से बीमारी और मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, बोला—‘बीमारी आपकी लापरवाही से फैली, इलाज की जिम्मेदारी भी आपकी’
ज्योलीकोट समेत आसपास के गांवों में पेयजल संकट पर अफसरों की लगी क्लास, छह दिन में जल स्रोतों की जांच रिपोर्ट तलब; सीएम धामी ने भी दिए जांच के निर्देश
नैनीताल। नैनीताल के समीपवर्ती ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीड़ा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने और मौतों के मामले ने अब शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को साफ शब्दों में उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया है।
वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ के समक्ष नैनीताल के डीएम ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत सहित जल संस्थान और जल निगम के शीर्ष अधिकारी पेश हुए। सुनवाई के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल लाइनों की मरम्मत कर दी जाती तो ग्रामीणों को इस गंभीर संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
कोर्ट ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही से फैली है, इसलिए इलाज और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी। अदालत की इस टिप्पणी ने पूरे मामले में विभागीय लापरवाही को लेकर उठ रहे सवालों को और गंभीर बना दिया है।
‘महामारी जैसी स्थिति’ पर कोर्ट की चिंता
अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्थिति को महामारी जैसी बताते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब को जल्द मंजूरी देने को कहा है।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल और आसपास के जल स्रोतों से पानी के नमूने लेकर छह दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने डीएम को पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करने और प्रभावित लोगों की समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
सीएम धामी ने भी दिए जांच के आदेश
इधर ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारी फैलने की सूचना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान ने सीजीएम जल संस्थान डीके सिंह से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
सचिव ने मामले में इंजीनियरों की जवाबदेही तय करने और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब सवाल सिर्फ पानी का नहीं, जवाबदेही का है
दूषित पानी से बीमारियों और मौतों के बाद हाईकोर्ट की सख्ती ने जल संस्थान, जल निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर पेयजल और सीवर लाइनों की स्थिति समय रहते क्यों नहीं सुधारी गई?
जब ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर थे, तब जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां थी? और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो क्या केवल रिपोर्ट तैयार होगी या जिम्मेदार अफसरों पर वास्तव में कार्रवाई भी होगी?
अब हाईकोर्ट के निर्देशों और मुख्यमंत्री के जांच आदेश के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस संकट की वास्तविक वजह सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी।
