‘100 प्रतिशत टिकट लेकर आऊंगा, जीत कांग्रेस की झोली में डालूंगा’—शंकर जोशी का खुला ऐलान, लालकुआं में बढ़ी सियासी तपिश!
‘द्वारिकाधीश मेरे पास हैं, सुदामा मैं हूं’… नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से नजदीकी का सियासी संदेश? महिला नेतृत्व पर पत्नी का नाम लेकर खोला दूसरा पत्ता, बिंदुखत्ता से चोरगलिया तक विकास का खींचा खाका।
दर्पण न्यूज 24/7 | लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा में 2027 के चुनाव की दस्तक के साथ ही कांग्रेस की टिकट की जंग अब दिलचस्प और रोमांचक होती जा रही है। दावेदारों की लंबी कतार है, राजनीतिक समीकरणों की अपनी बिसात है और हर नेता अपने प्रभाव, संगठन में पकड़ तथा बड़े नेताओं से नजदीकी के सहारे टिकट की दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश सचिव शंकर जोशी ने ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने लालकुआं की राजनीतिक चर्चाओं को नई धार दे दी है।
शंकर जोशी का दो टूक दावा है—’मैं 100 प्रतिशत टिकट लेकर आऊंगा और जीत कांग्रेस की झोली में डालूंगा।’ यानी इस बार वह केवल दूसरे प्रत्याशियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने या संगठन का मोर्चा संभालने के मूड में नहीं हैं, बल्कि खुद को लालकुआं से कांग्रेस का चेहरा मानकर मैदान में उतरने की तैयारी जता रहे हैं।
उनके बयान में आत्मविश्वास है, राजनीतिक रिश्तों का संकेत है और पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी का खुला संदेश भी। सबसे ज्यादा चर्चा उनके इस जुमले की हो रही है—’द्वारिकाधीश मेरे पास हैं, सुदामा मैं हूं।’ नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के बेहद करीबी माने जाने वाले शंकर जोशी की इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में उनके प्रभावशाली राजनीतिक संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सवाल है कि क्या वह अपने राजनीतिक मार्गदर्शक और वरिष्ठ नेतृत्व से नजदीकी के भरोसे टिकट की राह आसान मान रहे हैं?
तीन दशक तक दूसरों की नैया पार लगाई, अब खुद विधानसभा पहुंचने की तैयारी!
शंकर जोशी ने अपनी दावेदारी के समर्थन में करीब तीन दशक की चुनावी सक्रियता का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 और 2007 में हरिश्चंद्र दुर्गापाल, 2012 में हरेंद्र बोरा, 2017 में फिर हरिश्चंद्र दुर्गापाल और 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव में उन्होंने पार्टी के लिए काम किया।
उनका कहना है कि वह वर्षों से कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए चुनावी मोर्चा संभालते आए हैं। अब पार्टी को उन्हें स्वयं चुनाव लड़ने का अवसर देना चाहिए।
उनकी इस दलील में पुराने राजनीतिक योगदान का हिसाब भी है और अपनी हिस्सेदारी का दावा भी। लेकिन कांग्रेस के सामने सवाल है कि क्या लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस बार टिकट वितरण में प्राथमिकता मिलेगी या फिर पार्टी किसी नए चेहरे अथवा दूसरे राजनीतिक समीकरण पर दांव लगाएगी?
‘द्वारिकाधीश मेरे पास हैं, सुदामा मैं हूं’—यशपाल आर्य कनेक्शन की चर्चा!
साक्षात्कार का सबसे दिलचस्प राजनीतिक क्षण तब आया, जब शंकर जोशी ने कहा—’द्वारिकाधीश तो मेरे पास हैं, सुदामा मैं हूं।’
शंकर जोशी को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में उनके इस बयान को यशपाल आर्य के साथ उनके राजनीतिक रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। क्या इस उपमा के जरिये वह अपने राजनीतिक मार्गदर्शक से नजदीकी और उनके भरोसे का संदेश देना चाह रहे थे? क्या उन्हें लगता है कि वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उनके संबंध टिकट की दौड़ में उनकी दावेदारी को मजबूती दे सकते हैं?
हालांकि उन्होंने इस उपमा का स्पष्ट संदर्भ नहीं बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके मायने तलाशे जाने लगे हैं। लालकुआं की टिकट की लड़ाई में अब केवल दावेदारों की संख्या ही नहीं, बल्कि किसके पीछे किसका राजनीतिक समर्थन है, यह चर्चा भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
महिला नेतृत्व की बात आई तो पत्नी का नाम भी सामने रखा!
शंकर जोशी से जब पूछा गया कि यदि कांग्रेस महिला नेतृत्व या महिला प्रत्याशी को प्राथमिकता देती है तो उनकी रणनीति क्या होगी, तब उन्होंने अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए उन्हें एक सक्षम महिला दावेदार बताया।
इस जवाब से उन्होंने साफ कर दिया कि महिला नेतृत्व के विकल्प को भी वह नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। हालांकि उनकी अपनी दावेदारी को लेकर 100 प्रतिशत भरोसा बरकरार है, लेकिन महिला प्रत्याशी को प्राथमिकता दिए जाने की स्थिति में पत्नी का नाम भी सामने रखने का संकेत उन्होंने दिया।
यानी शंकर जोशी की रणनीति में अपनी दावेदारी के साथ महिला नेतृत्व के विकल्प की गुंजाइश भी दिखाई देती है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की टिकट चयन प्रक्रिया में यह पहलू कितना महत्वपूर्ण साबित होता है।
बिंदुखत्ता से बरेली रोड और चोरगलिया तक विकास का एजेंडा!
टिकट के दावे के साथ शंकर जोशी ने लालकुआं विधानसभा के लिए अपना विकास एजेंडा भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव केवल बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के मुद्दे पर नहीं लड़ा जाना चाहिए। बरेली रोड, गौला पार और चोरगलिया की समस्याएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की पैरवी करते हुए कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में नगर पालिका गठन की पहल का हवाला दिया और भाजपा सरकार पर उस फैसले को वापस लेने का आरोप लगाया।
उनकी प्राथमिकताओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा तथा विधानसभा की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाना शामिल है।
हालांकि रोजगार और विकास के इन वादों को धरातल पर उतारने के लिए बजट, नीति और समयसीमा का ठोस खाका सामने आना बाकी है। जनता के सामने केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की व्यावहारिक योजना भी महत्वपूर्ण होगी।
हाईवे हादसों पर केंद्र को घेरा, जनप्रतिनिधियों को भी दी नसीहत!
लालकुआं हाईवे पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और उजड़ते परिवारों का मुद्दा उठा तो शंकर जोशी ने राष्ट्रीय राजमार्ग को केंद्र सरकार के अधीन बताते हुए केंद्र की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का काम केवल अपनी सरकार के कामों का श्रेय लेना नहीं है। विपक्ष को भी जनता की समस्याओं पर आवाज उठानी चाहिए। विकास के सवाल पर पक्ष और विपक्ष दोनों को एक साथ खड़ा होना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब लालकुआं हाईवे पर दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा इंतजाम स्थानीय जनता की बड़ी मांग बने हुए हैं।
कांग्रेस में गुटबाजी से इनकार, बोले—टिकट जिसे मिलेगा, सब लड़ाएंगे चुनाव!
कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी पर शंकर जोशी ने पार्टी में किसी तरह की फूट होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व का निर्देश स्पष्ट है कि जिसे भी कांग्रेस का चुनाव चिह्न मिलेगा, सभी नेता मिलकर उसे चुनाव लड़ाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी उनसे अधिक योग्य किसी दूसरे व्यक्ति को टिकट देती है तो संगठन का फैसला सर्वमान्य होगा।
लेकिन उनके 100 प्रतिशत टिकट मिलने के दावे और दूसरे दावेदारों के प्रति सम्मानजनक रुख के बीच राजनीतिक सवाल अपनी जगह है। क्या लालकुआं कांग्रेस में सभी दावेदार वास्तव में एक मंच पर आ पाएंगे? या टिकट की घोषणा के बाद अंदरूनी समीकरण कोई नया मोड़ लेंगे?
दूसरे क्षेत्रों में संगठन की जिम्मेदारी, दिल में लालकुआं की दावेदारी!
प्रदेश संगठन की ओर से दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी मिलने को लेकर उठ रही चर्चाओं पर उन्होंने इसे संगठन की सामान्य प्रक्रिया बताया। उनका कहना था कि वर्तमान और पूर्व विधायकों तथा वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वय की जिम्मेदारी दी जाती है। यह अस्थायी संगठनात्मक जिम्मेदारी है, जबकि उनकी राजनीतिक प्राथमिकता लालकुआं विधानसभा ही है।
उन्होंने बताया कि अपनी दावेदारी से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा चुके हैं और अब औपचारिक रायशुमारी तथा संगठन की अगली प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
अब कांग्रेस के सामने टिकट का पेचीदा सवाल!
लालकुआं में कांग्रेस के सामने इस बार चुनौती केवल भाजपा को टक्कर देने वाले चेहरे की तलाश नहीं है। पार्टी को स्थानीय समीकरण, संगठनात्मक पकड़, चुनावी अनुभव, जनाधार और दावेदारों के बीच तालमेल भी देखना होगा।
शंकर जोशी ने अपने 100 प्रतिशत टिकट के दावे, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से नजदीकी के सियासी संकेत और महिला नेतृत्व के सवाल पर पत्नी का नाम लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति के कई पहलू सामने रख दिए हैं।
अब सवाल यह है कि क्या तीन दशक की चुनावी सक्रियता उन्हें टिकट दिला पाएगी? क्या यशपाल आर्य से उनकी नजदीकी राजनीतिक लाभ में तब्दील होगी? क्या कांग्रेस नेतृत्व उनके आत्मविश्वास पर भरोसा जताएगा? और क्या लालकुआं की जनता उनके विकास एजेंडे को स्वीकार करेगी?
फिलहाल शंकर जोशी ने टिकट की लड़ाई में अपनी ओर से बिगुल बजा दिया है। दावा 100 प्रतिशत का है, भरोसा बड़े राजनीतिक रिश्तों का है और नजर कांग्रेस के टिकट पर। लेकिन आखिरी फैसला न रिश्तों का होगा, न दावों का—फैसला कांग्रेस हाईकमान और चुनावी मैदान में जनता को करना है।
लालकुआं की सियासत में अब देखना दिलचस्प होगा कि शंकर जोशी का यह आत्मविश्वास टिकट की दहलीज पार कर पाता है या कांग्रेस की टिकट की दौड़ में कोई दूसरा चेहरा बाजी मार ले जाता है।

