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पंजाबी गौरव सम्मेलन में धामी ने साधा तराई का सियासी समीकरण!
तराई में ‘पंजाबी गौरव’ की गूंज, धामी ने किया सिख समाज से सीधा संवाद!
राष्ट्र निर्माण और तराई के विकास में सिख समाज के योगदान को सराहा, धार्मिक विरासत से लेकर रोपवे और विभाजन स्मृति स्थल तक गिनाईं सरकार की उपलब्धियां!

रुद्रपुर।

तराई की सियासत में सिख और पंजाबी समाज की अहम भूमिका के बीच रुद्रपुर में आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संदेश देने का काम किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में आयोजित सम्मेलन में जहां सिख समाज की गौरवशाली परंपरा, राष्ट्र निर्माण में योगदान और तराई के विकास में भूमिका को रेखांकित किया गया, वहीं सरकार की नीतियों और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यों का भी विस्तार से उल्लेख हुआ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सम्मेलन स्थल पर पहुंचते ही ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ के जयकारे गूंजे। सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोपा भेंट किया गया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन महज सम्मेलन नहीं, बल्कि पंजाबी समाज की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति, संस्कार, साहस, सेवा और राष्ट्रभक्ति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने सिख गुरुओं की परंपरा को भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि गुरु साहिबान का जीवन अन्याय के सामने न झुकने, जरूरतमंद की सेवा करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
धामी ने कहा कि सिख समाज ने सीमा पर देश की रक्षा से लेकर खेतों में अन्न उत्पादन, उद्योग-व्यापार और आपदा के समय सेवा कार्यों तक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तराई के विकास में भी पंजाबी समाज की मेहनत और उद्यमशीलता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा सिख समाज से जुड़े विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर, लंगर को करों से मुक्त किए जाने, श्री हरमंदिर साहिब को विदेशी अंशदान की स्वीकृति, गुरु गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती के आयोजन और साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस घोषित किए जाने को प्रमुख कदम बताया।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को सुरक्षित भारत लाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को न्याय और सम्मान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं।
उत्तराखंड से सिख समाज के भावनात्मक रिश्ते पर जोर
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड और सिख समाज के पुराने आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र चरण इस धरती पर पड़े हैं। हेमकुंड साहिब और रीठा साहिब जैसी धार्मिक धरोहरें उत्तराखंड की आस्था और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक प्रस्तावित 12.5 किलोमीटर लंबे रोपवे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे बुजुर्गों, महिलाओं और श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होगी तथा तीर्थयात्रियों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
धामी ने 1947 के विभाजन पीड़ितों की स्मृति में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल’ के निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में धर्मांतरण और दंगा विरोधी कानूनों को सख्त किए जाने तथा अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों की भी जानकारी दी।
विकास के साथ विरासत का संदेश
मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी से सिख गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर मेहनत, अनुशासन, साहस और राष्ट्रभक्ति के रास्ते पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को केवल विकसित प्रदेश बनाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि ऐसा राज्य बनाना है जहां विकास के साथ विरासत का सम्मान, आधुनिकता के साथ संस्कार और प्रगति के साथ सामाजिक समरसता कायम रहे।
तराई के विकास में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सिख समाज ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भविष्य में भी समाज इसी भावना के साथ अपना योगदान देता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर काम करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के मंत्री बलदेव सिंह औलख, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक शिव अरोड़ा, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, विधायक त्रिलोक चीमा, अरविंद पांडे, दर्जा मंत्री उत्तम दत्ता, मंजीत सिंह राजू, सुरेंद्र नामधारी, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

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