








ईरान नहीं झुका, इजराइल के ताबड़तोड़ हमले तेज; खाड़ी में अलर्ट, तेल बाजार में उथल-पुथल!
दुबई/तेहरान/यरूशलम। पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजराइल ने शुक्रवार को ईरान पर नये सिरे से बड़े हमले करते हुए तेहरान में बैलिस्टिक मिसाइल और हथियार निर्माण ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे, जिससे पूरे क्षेत्र में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
इजराइली सेना के अनुसार, तेहरान और पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्चर, हथियार भंडारण और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। वहीं इजराइल में भी सायरन गूंजे और सेना ने ईरानी मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई तेज कर दी।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए “सार्थक बातचीत” जारी है। हालांकि ईरान ने किसी भी वार्ता में शामिल होने से इनकार किया है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की समय-सीमा बढ़ाते हुए संकेत दिए हैं कि अमेरिका कूटनीति और सैन्य—दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों के चलते बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। कुवैत के शुवेख बंदरगाह को भी हमले में नुकसान पहुंचने की खबर है, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।
इजराइल की चेतावनी: हमले और होंगे व्यापक
यरूशलम से इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने साफ कहा कि यदि ईरान ने हमले नहीं रोके तो कार्रवाई और तेज व व्यापक होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर ईरान को “भारी कीमत” चुकाने की चेतावनी दी।
तेल आपूर्ति पर खतरा, बाजारों में गिरावट
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। संकट गहराने के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव, ईरान का इनकार
अमेरिका ने युद्धविराम के लिए ईरान के सामने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर रोक और होर्मुज जलमार्ग खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं। इसके जवाब में ईरान ने पांच बिंदुओं का प्रस्ताव देते हुए युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता की मांग रखी है।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीधी वार्ता कराने की कोशिशें जारी हैं और संभावित बातचीत के लिए पाकिस्तान जैसे तटस्थ मंच पर विचार हो रहा है। हालांकि जमीनी हालात फिलहाल किसी भी तत्काल शांति की संभावना को कमजोर करते नजर आ रहे हैं।
