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अब मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र खटीमा में बाघ का आतंक: बुज़ुर्ग को बनाया निवाला, देर से पहुंचा वन विभाग… पूरे प्रदेश में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष के बीच जिम्मेदारों की खुली उदासीनता! कापड़ी का वार— सीएम के आदेश हवा-हवाई, सिस्टम पूरी तरह फेल।
दर्पण न्यूज 24/7
खटीमा। उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदेशभर में लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार विभागों की उदासीनता एक बार फिर मौत का कारण बन गई। रविवार को लकड़ी लेने गए बग्गा चकरपुर लाइन निवासी 65 वर्षीय शेर सिंह पर बाघ ने अचानक हमला कर उन्हें अपना शिकार बना लिया। देर रात घटना का पता चला तो क्षेत्र में सनसनी फैल गई। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बाघ की गतिविधियां लंबे समय से देखी जा रही थीं, फिर भी न कोई मुनादी, न सुरक्षा व्यवस्था और न ही मॉनिटरिंग— परिणामस्वरूप एक निर्दोष बुज़ुर्ग की जान चली गई। लोगों का कहना है कि पूरे प्रदेश में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ রही हैं, लेकिन सरकारी तंत्र केवल ‘मीटिंग–फाइल–निर्देश’ तक सीमित है, जमीनी कार्रवाई शून्य है।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक एवं उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी मृतक परिजनों से मिले और ढांढस बंधाया। इस दौरान उन्होंने सरकार और वन विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा—
“मुख्यमंत्री के वन्यजीव नियंत्रण और सुरक्षा के तमाम आदेश केवल कागज़ों में हैं। व्यवस्था ध्वस्त है, वन विभाग की लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। जनता भगवान भरोसे छोड़ दी गई है, जबकि सरकार आंखें मूंदे बैठी है।”
कापड़ी ने घटना को सरकार की नाकामी करार देते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा, प्रभावित क्षेत्र में ड्रोन निगरानी, क्यूआरटी टीम की तैनाती, ट्रैपिंग सिस्टम और ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।
उधर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं— आखिर कब तक सरकारी लापरवाही की कीमत जान देकर चुकानी पड़ेगी?

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