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बीस हज़ार की बोली में बिकता सिस्टम! ‘जीरो टॉलरेंस’ की दुकान पर रिश्वत की खुली बिक्री—वायरल वीडियो से जसपुर में सियासी भूचाल देखे वीडियो!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | जसपुर।
काग़ज़ों में जीरो टॉलरेंस की इबारत चमकती है,
जमीनी हकीकत में रिश्वत की दुकान सजती है…
जसपुर तहसील से सामने आए ₹20 हजार की कथित रिश्वत मांग के वायरल वीडियो ने सिस्टम की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। तहसीलदार के नाम पर खुलेआम रकम की “बोली” लगते देख जनता का भरोसा एक बार फिर कटघरे में खड़ा हो गया।
वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही सियासी पारा उबल पड़ा। कांग्रेस विधायक आदेश सिंह चौहान खुद तहसील पहुंचे और व्यवस्था को आईना दिखाते हुए सवाल दाग दिए—
“अगर कैमरे में रिश्वत पकड़ी जा सकती है, तो फाइलों में छुपा भ्रष्टाचार क्यों नहीं?”
🧾 ‘जीरो टॉलरेंस’ बनाम जमीनी हकीकत
चुनावी साल में जब मंचों से ईमानदारी के गीत गाए जा रहे हैं,
तहसीलों में नोटों की तान पर फाइलें नाच रही हैं…
वायरल वीडियो ने यही फर्क उजागर कर दिया है। लोगों में आक्रोश है—कहते हैं, “अगर 20 हजार कैमरे में दिख गया, तो बिना कैमरे कितने ‘हज़ारों’ का हिसाब कौन देगा?”
🎤 विधायक के तेवर: ‘यह एक मामला नहीं, बीमारी है’
विधायक आदेश चौहान ने इसे महज़ एक शिकायत मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि यह पूरी व्यवस्था में जड़ जमा चुकी बीमारी की बानगी है। तहसील परिसर में उनके तेवर सख़्त थे और संदेश साफ—
“भ्रष्टाचार पर परदा डालने की आदत छोड़ो, नहीं तो परदे के पीछे के चेहरे जनता खुद बेनकाब कर देगी।”
📱 वायरल वीडियो ने खोली पोल
सोशल मीडिया की अदालत में सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया गया है। लोग पूछ रहे हैं—
जब कैमरा बोले, तभी कार्रवाई होगी?
और जब कैमरा खामोश हो, तब ‘न्याय’ भी खामोश हो जाएगा?
🔍 अब सवालों के घेरे में प्रशासन
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच की बात तो हो रही है,
मगर जनता का सवाल है—
“जांच होगी या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?”
कुल मिलाकर जसपुर में यह वीडियो सिर्फ एक रिश्वत का नहीं,
बल्कि उस सिस्टम का आईना है—
जहां ‘जीरो टॉलरेंस’ भाषणों में है,
और ‘बीस हज़ार’ हकीकत में!