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केदारनाथ दर्शन पर सारा अली खान को घेरने लगे धर्म के पहरेदार!

किसी ने बताया हराम तो किसी ने कहा- मंदिर पर्यटन स्थल नहीं, तीर्थस्थल हैं; अभिनेत्री के दौरे पर फिर छिड़ी धार्मिक बहस!

देहरादून। बाबा केदारनाथ के दरबार में माथा टेकना बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के लिए एक बार फिर चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। केदारनाथ धाम में दर्शन, पूजा और आरती में शामिल होने के बाद अभिनेत्री को लेकर धार्मिक बयानबाजी तेज हो गई है। किसी ने उनके मंदिर जाने पर सवाल उठाए तो किसी ने इसे आस्था से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी। सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था और उसके पूजा-अर्चना करने के अधिकार पर फैसला सुनाने का हक आखिर किसे है?

सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदू मंदिर पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि तीर्थस्थल हैं। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी की आस्था है तो वह मंदिर जा सकता है, लेकिन वहां अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ पहुंचना चाहिए। उन्होंने इस फैसले का स्वागत भी किया।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने धार्मिक आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि डांडिया रास जैसे आयोजनों में मुस्लिम लड़कों की भागीदारी स्वीकार्य है तो परिवार की बेटियों की भागीदारी पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? उन्होंने इस विषय को मौलानाओं और मुस्लिम समाज के भीतर उठने वाले सवालों से जोड़कर अपनी बात रखी।

मौलाना की आपत्ति से शुरू हुई बयानबाजी!

दरअसल, सारा अली खान हाल ही में उत्तराखंड स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम पहुंची थीं। उन्होंने बाबा केदार के दर्शन किए और पूजा-अर्चना के साथ आरती में भी हिस्सा लिया। इसके अलावा उन्होंने भुकुंट भैरव मंदिर में भी पूजा की।

सारा के इस दौरे पर बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आपत्ति जताई थी। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना ने अभिनेत्री के मंदिर जाने और हिंदू धार्मिक परंपराओं में शामिल होने को इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार नाजायज और हराम बताया। साथ ही उनसे अल्लाह से माफी मांगने यानी तौबा करने की अपील की।

मौलाना के इस बयान के बाद मामला धार्मिक बहस का विषय बन गया। अब स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।

पहले भी विवादों में रही हैं सारा!

यह पहला मौका नहीं है जब सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर सवाल उठे हों। वर्ष 2018 में उनकी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ की रिलीज के दौरान भी फिल्म की कहानी और विषयवस्तु को लेकर विरोध हुआ था। इसके बाद भी सारा के अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर जाने को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार टिप्पणियां होती रही हैं।

आस्था पर सवाल या धार्मिक पहचान की कसौटी?

केदारनाथ देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां हर साल अलग-अलग धर्मों, क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों से लोग पहुंचते हैं। ऐसे में सारा अली खान के दर्शन को लेकर उठी बयानबाजी ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी धार्मिक स्थल पर जाने और अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अधिकार भी अब धार्मिक पहचान के आधार पर तय होगा?

फिलहाल सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने मंदिर, आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सोच को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

दर्पण न्यूज 24/7 | देहरादून

उत्तराखंड