“पंतनगर विश्वविद्यालय में दो छात्रों की आत्महत्या—एक की मौत, दूसरा जिंदगी मौत से जूझ रहा… अभिभावकों में गहरी चिंता।
पंतनगर विश्वविद्यालय में दो छात्रों का आत्मघाती कदम, एक की मौत—दूसरा गंभीर, कैंपस का माहौल शोक और दहशत में डूबा।
पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से सोमवार देर शाम सामने आई दर्दनाक घटना ने शिक्षण जगत के साथ-साथ अभिभावकों के मन में भी गहरी दहशत भर दी है। दो छात्रों द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने के बाद एक छात्र की मौत हो गई, वहीं दूसरा छात्र गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
घटना के बाद अफरा-तफरी, छात्रों में मातम
दोनों छात्र संदिग्ध हालत में बेहोश पाए गए। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुँचाया, परंतु एक छात्र को बचाया नहीं जा सका। दूसरे छात्र की हालत नाजुक है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं।
कैंपस में गहरा सन्नाटा है। हॉस्टलों में दोस्त और सहपाठी सदमे में हैं। कई छात्र तनाव में दिख रहे हैं।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता — “क्या हमारे बच्चे सुरक्षित हैं?”
घटना की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में फैली, अभिभावकों में भारी बेचैनी और आक्रोश पैदा हो गया।
कई अभिभावकों ने सवाल उठाए कि
“अगर विश्वविद्यालय इतना प्रतिष्ठित है तो ऐसी घटनाएँ बार-बार क्यों हो रही हैं?”
माता-पिता ने कहा कि તેઓ बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए दूर भेजते हैं, लेकिन
कैंपस में असुरक्षा और मानसिक दबाव की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
कई अभिभावक विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क कर अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।
कुछ लोग हॉस्टल तक पहुँचकर अपने बच्चों की स्थिति खुद देखने को मजबूर हुए।
मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल
अभिभावकों का कहना है कि विश्वविद्यालय में काउंसलिंग और मेंटल हेल्थ सपोर्ट को और मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने चिंता जताई कि
“पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिताओं का तनाव और भविष्य की अनिश्चितता बच्चों को मानसिक रूप से कमज़ोर बना रहे हैं।”
पुलिस और प्रशासन दोनों सक्रिय, हर एंगल से जांच
पुलिस ने हॉस्टल और छात्रों के निजी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और परिवारों को पूरी सहायता देने की घोषणा की है।
घटनाक्रम ने पूरे राज्य में उठाए सवाल
इस हादसे ने न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों, बल्कि पूरे प्रदेश के अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच में क्या खुलासा होता है और विश्वविद्यालय छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।
