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परम्परा बनता अनुपूरक बजट: विकास को रफ्तार या चुनाव से पहले अधूरे काम पूरे करने की तैयारी?

उत्तराखण्ड में ₹7,844 करोड़ का अतिरिक्त बजट, जल जीवन मिशन से लेकर रोजगार और जनकल्याण तक कई क्षेत्रों पर फोकस; अब सवाल—जमीन पर कितना दिखेगा असर?

विशेष लेख | जगमोहन रौतेला

गैरसैंण। उत्तराखण्ड में अनुपूरक बजट अब लगभग हर साल की परम्परा बनता जा रहा है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया है। इसके बाद राज्य के बजट का आकार बढ़कर 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो गया है।

भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम विधानसभा सत्र में पेश इस बजट को विकास योजनाओं को गति देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, चुनावी साल में सवाल यह भी है कि अतिरिक्त धनराशि से जनता को कितनी राहत मिलेगी और कितनी योजनाएं वास्तव में पूरी हो पाएंगी?

पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर

अनुपूरक बजट में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 4,164 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़, अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़, कर्मचारियों के गोल्डन कार्ड के लिए 125 करोड़ और मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों के लिए 160 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़, हल्द्वानी में खेल विश्वविद्यालय के लिए 35 करोड़ और चम्पावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन योजनाओं के लिए 93 करोड़ और निराश्रित विधवाओं की आर्थिक सहायता के लिए 27 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

उद्योग और किसानों को क्या मिलेगा?

मेगा इंडस्ट्रियल नीति के तहत लंबित अनुदानों के भुगतान के लिए 12 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे उद्योगों को राहत और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

वहीं, जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके जरिए किसानों को कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय दिलाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

हरिद्वार में कुंभ की तैयारियों के लिए 290 करोड़ और वर्ष 2027 की नंदा राजजात यात्रा के लिए 20 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

नल कनेक्शन के बाद अब नियमित पानी की चुनौती

जल जीवन मिशन के तहत राज्य में 98.12 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन पहुंचने का दावा किया गया है। लेकिन असली चुनौती हर घर तक नियमित और पर्याप्त पानी पहुंचाने की है। योजना के लिए अतिरिक्त बजट और ठेकेदारों के बकाया भुगतान की व्यवस्था के बाद अब देखना होगा कि अधूरे काम कितनी तेजी से पूरे होते हैं।

अनुपूरक बजट पर सबसे बड़ा सवाल

अनुपूरक बजट नई वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है, लेकिन हर साल बड़े अतिरिक्त बजट की जरूरत मूल बजट की योजना और खर्च की समीक्षा का सवाल भी खड़ा करती है।

जनता के लिए बजट का असली मूल्य घोषणाओं में नहीं, परिणामों में है। क्या अतिरिक्त धनराशि से गांवों में पानी पहुंचेगा, अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ेंगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसानों की आय में सुधार होगा? चुनाव से पहले सरकार के सामने इन सवालों का जवाब देना महत्वपूर्ण होगा।

गैरसैंण में पेश यह बजट विकास को नई गति देगा या अनुपूरक बजट की परम्परा का एक और अध्याय बनेगा—इसका फैसला अब योजनाओं के धरातल पर उतरने से होगा।

दर्पण न्यूज 24/7

 

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