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करवा चौथ विशेष: व्रत से परे भी है प्रेम की असली कहानी, चांद से नहीं रिश्तों से रोशन होती है जिंदगी।

दर्पण न्यूज 24/7 की विशेष प्रस्तुति

29 अक्टूबर 2026 |

करवा चौथ पर आज चांद का इंतजार है। हाथों में मेहंदी, चेहरे पर चमक, पूजा की थाली और पति की लंबी उम्र की कामना… भारतीय संस्कृति में यह पर्व प्रेम, आस्था और समर्पण का अनूठा प्रतीक है। लेकिन एक सवाल है, जिस पर हर दंपती को जरूर सोचना चाहिए—क्या पत्नी का दिनभर भूखे-प्यासे रहना ही प्रेम है, या उसके प्रति पति की परवाह भी उतनी ही जरूरी है?

दरअसल, करवा चौथ सिर्फ व्रत का नहीं, रिश्तों में विश्वास और साझेदारी का पर्व भी है।

पत्नी का व्रत, पति की जिम्मेदारी।

करवा चौथ पर महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। यह उनकी आस्था और प्रेम का विषय है। लेकिन पति का दायित्व भी केवल चांद निकलने पर पत्नी को पानी पिलाने या उपहार देने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

पत्नी की भावनाओं को समझना, उसकी मेहनत का सम्मान करना, घर की जिम्मेदारियां साझा करना और मुश्किल वक्त में उसके साथ खड़े रहना भी प्रेम की असली पहचान है।

पत्नी का त्याग उसकी आस्था है, लेकिन पति की परवाह उसके सम्मान की पहचान है।

रिश्तों की उम्र व्रत से नहीं, विश्वास से बढ़ती है

आज के बदलते दौर में पति-पत्नी दोनों घर और बाहर की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में करवा चौथ का संदेश और व्यापक हो जाता है। प्रेम किसी एक की परीक्षा नहीं, बल्कि दोनों की साझी जिम्मेदारी है।

रिश्तों में मतभेद होना असामान्य नहीं, लेकिन संवाद की कमी, अविश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का अभाव दूरियां बढ़ा सकता है। कोई एक पूजा या व्रत रिश्ते की हर समस्या हल नहीं कर सकता। इसके लिए जरूरी है ईमानदारी, आपसी समझ और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान।

इस करवा चौथ लें एक संकल्प

चांद देखकर व्रत खोलने की परंपरा अपनी जगह खूबसूरत है, लेकिन इस दिन एक-दूसरे से यह वादा भी किया जा सकता है कि सुख-दुख में साथ निभाएंगे, जिम्मेदारियां बांटेंगे और एक-दूसरे के सपनों को पूरा करने में सहयोग करेंगे।

आखिर सच्चा सुहाग केवल शृंगार में नहीं, बल्कि उस रिश्ते में दिखाई देता है जहां पत्नी को सम्मान और पति को विश्वास मिले, जहां प्रेम शब्दों से आगे बढ़कर व्यवहार में नजर आए।

करवा चौथ का सबसे खूबसूरत संदेश यही है—चांद का दीदार साल में कई बार हो सकता है, लेकिन जीवनसाथी का साथ तभी अनमोल बनता है, जब उसमें प्रेम के साथ सम्मान और बराबरी भी हो।

समस्त दंपतियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रस्तुति: प्रमोद बमेटा

उत्तराखंड