गर्जिया नदीतट बना दुर्लभ पक्षियों का आश्रय।
रामनगर।
कॉर्बेट परिदृश्य का एक जीवंत उदाहरण और जैव विविधता से भरपूर स्थान है गर्जिया का कोसी नदी किनारा, जो सर्दियों में पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। प्रवासी पक्षियों के आगमन के साथ यह क्षेत्र अपने जल-परिस्थितिकी, साफ विशाल तट, खुले कंकरीले मैदान और सुरक्षित आवास के कारण दुर्लभ एवं संवेदनशील प्रजातियों को आकर्षित करता है।
इस प्राकृतिक धरोहर को अनुभव कराने के लिए मैगपाई कॉर्बेट ने गर्जिया क्षेत्र में एक विशेष पक्षी-वॉक का आयोजन किया, जिसमें पक्षी प्रेमियों को कई महत्वपूर्ण और दुर्लभप्रजातियों का अवलोकन करने का मौका मिला। वॉक के दौरान कई महत्वपूर्ण पक्षियों की प्रजातियों का अवलोकन किया गया, जिनमें आईबिस बिल, ग्रेट थिक-नी और हिमालयन गिफॉन शामिल थे, जो कि आईयूसीएन रेड लिस्ट में नियर थ्रीटेंड
की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, गर्जिया के कोसी नदी के आस-पास ऊनी गर्दन वाला सारस भी दिखाई दिया, जो खुद एक वल्नरेबल प्रजाति है और स्वच्छ एवं अनुकूल आवास में रहने का आदी है।
इन संवेदनशील प्रजातियों के अलावा कॉमन मरगेन्सर, रुड्डी शेलडक, कॉमन ग्रीनशैंक, लिटिल रिंग्ड प्लोवर और वॉलक्रीपर जैसी आकर्षक प्रजातियां भी देखी गईं, जो नदी-तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत देती हैं। ये पक्षी पर्यावरण की सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक हैं और उनका यहां देखना इस क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाता है।
इस विशेष पक्षी-वॉक का नेतृत्व वन्यजीव फोटोग्राफर और मैगपाई कॉर्बेट के संस्थापक दीपांकर खुल्बे ने किया। इसके साथ ही, विशेषज्ञ बर्डिंग गाइड और वन्यजीव फोटोग्राफर जेसन कोटिन्हो, राहुल रौतेला और शिखा पांडे भी उपस्थित रहे। वॉक के
दौरान, अनुभवी बर्डर्स ने दूरबीनों और कैमरों के माध्यम से पक्षी जीवन का अवलोकन किया, जिससे उपस्थित लोगों को प्रकृति की सुंदरता और इसके संवेदनशील पहलुओं से जुड़ने
का मौका मिला। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नदी-आधारित पारिस्थितिकी की महत्ता को समझाना और वैज्ञानिक व सामुदायिक स्तर पर पक्षियों के दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना है।
