








बजट सत्र का रण: सत्ता की ढाल बनाम विपक्ष के तीर, आज गैरसैंण में गूंजेगी सियासत की तकरीर!
प्रमोद बमेटा
दर्पण न्यूज 24/7
गैरसैंण/देहरादून।
गैरसैंण की वादियों में इस बार सिर्फ पहाड़ों की खामोशी नहीं, सियासत की गूंज भी सुनाई देगी। आज से शुरू हो रहा उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं।
सत्ता पक्ष जहां बिना रुकावट विधायी कामकाज निपटाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुका है।
कहावत है—
“सियासत के मैदान में खामोशी कम ही दिखती है,
जहां सवाल उठते हैं, वहीं बहस की बिजली चमकती है।”
राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आज 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण के साथ सत्र का आगाज होगा। इसी अभिभाषण से यह भी साफ हो जाएगा कि विपक्ष सरकार को किस अंदाज में घेरने की रणनीति अपनाने वाला है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पहले से ही सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों की धार तेज कर चुका है। विपक्ष का मानना है कि वर्तमान विधानसभा का यह संभवतः अंतिम बजट सत्र है, इसलिए जनमुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
विपक्ष की मांग है कि बजट सत्र कम से कम 21 दिन तक चले, लेकिन सरकार की ओर से अभिभाषण के दिन ही वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने की तैयारी ने विपक्ष को असहज कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि सरकार परंपरा के विपरीत राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही बजट पेश कर नई परंपरा शुरू कर रही है, जो संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
उनका कहना है—
“जब सवालों से बचने लगे सरकार के कदम,
तो समझो सियासत में उठने लगे हैं नए संग्राम।”
सरकार की प्राथमिकता बजट पारित कराने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर उन्हें पारित कराना भी है। विपक्ष के हमलों का सामना करने के लिए सरकार भी रणनीति के साथ मैदान में उतरने को तैयार है।
हालांकि आज प्रश्नकाल नहीं होगा, जिससे सरकार को विपक्ष के सीधे सवालों से कुछ राहत मिल सकती है। फिर भी सरकार की कोशिश रहेगी कि कम से कम राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में हंगामा न हो।
दूसरी ओर विपक्ष के लिए भी यह सत्र आगामी विधानसभा चुनाव की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का आरोप है कि वर्तमान विधानसभा के चार वर्षों में नौ सत्र हुए, लेकिन मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े सवालों के लिए निर्धारित दिन कभी सोमवार नहीं आया।
उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दों को भी सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बताया।
अब देखना दिलचस्प होगा कि गैरसैंण के सदन में
“सवालों की तलवार तेज होगी या जवाबों की ढाल मजबूत,”
क्योंकि बजट सत्र का यह रण आने वाली सियासत की दिशा भी तय कर सकता है।
