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👉 तराई केंद्रीय वन प्रभाग में बेखौफ लकड़ी माफिया! — मिशन ‘अंकुश’ के बावजूद तस्करी जारी, वन विभाग की चौकसी पर सवाल!

नैनीताल–ऊधमसिंह नगर।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल इन दिनों लकड़ी माफियाओं के निशाने पर हैं। खैर–सागौन की अवैध कटान और तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। लगातार कार्रवाई के दावों के बावजूद वन विभाग इन माफियाओं पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।

टांडा रेंज में मिशन अंकुश के तहत वन विभाग की टीम ने बीते दिनों अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध लकड़ी से लदे 6 वाहन पकड़े, साथ ही 6 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पकड़ी गई खैर व सागौन की लकड़ी की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

इसके बावजूद तराई केन्द्रीय वन प्रभाग, रुद्रपुर डिवीजन के जंगलों में तस्करों का कहर जारी है। घने कोहरे और सर्दियों का फायदा उठाते हुए माफिया रात के अंधेरे में जंगलों में घुसकर पेड़ों पर आरी चला रहे हैं।

🔥 वन विभाग के दावे बनाम जमीन हकीकत

वन विभाग का कहना है कि टीमें लगातार गश्त पर हैं, लेकिन खुद विभाग के रिकॉर्ड से साफ हो जाता है कि इस क्षेत्र में माफिया बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल में जंगलों के आसपास रहने वाले कुछ लोगों के साथ वन महकमे के चंद भ्रष्ट कर्मियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। यही कारण है कि छापेमारी के बाद भी तस्करी का सिलसिला बंद नहीं हो रहा। इससे जहां सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं जंगल तेजी से साफ हो रहे हैं और पर्यावरण पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

🔍 वन कर्मियों पर भी गिर सकती है गाज

वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम ने माना कि तस्करी में कुछ स्थानीय लोगों के साथ वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की सूचना मिली है।
उन्होंने कहा—
“जांच चल रही है, दोषी कोई भी हो—उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

लगातार बढ़ रही घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर लाखों रुपये के संसाधनों और बड़ी टीम के बावजूद ऊधमसिंह नगर का वन महकमा लकड़ी माफियाओं से क्यों हार रहा है?

 

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