“लालकुआँ में प्याऊ व्यवस्था फेल! मटके खाली, स्टेशन गेट पर कूड़े का पहाड़—राहगीर प्यासे, प्रशासन मौन”!
लालकुआँ। शहर में यात्रियों व राहगीरों के लिए बनाई गई प्याऊ व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नगर पंचायत द्वारा रेलवे स्टेशन मुख्य द्वार पर लगाए गए मटके कई दिनों से खाली पड़े हैं, जिन पर न निगरानी है न पानी भरने की व्यवस्था। हालत यह है कि राहगीर प्यास से बेहाल हैं जबकि जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ नाम मात्र की औपचारिकता पूरी कर पल्ला झाड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत ने प्याऊ खोलकर महज दिखावा किया है। जहां मटके लगाए गए हैं, वहां चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है। पास का मुख्य नाला भी पूरी तरह कूड़े से भरा पड़ा है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना जैसे बंद कर दिया है।
लालकुआँ शहर कुमाऊँ का व्यावसायिक हब माना जाता है। यहां गौला खनन और लकड़ी व्यापार के साथ रोजाना हजारों की संख्या में लोग रेलवे स्टेशन से आवाजाही करते हैं। ऐसे में प्याऊ जैसी सुविधा का दुरुस्त होना जरूरी माना जाता है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ साल पहले यहां तत्कालीन चेयरमैन रामबाबू मिश्रा द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वाटर कूलर लगवाए गए थे, जिनसे लोगों को ठंडा और साफ स्वच्छ पानी मिलता था। लेकिन इस बार नगर पंचायत ने उन कूलरों को हटाकर साधारण मटके लगा दिए—वो भी बिना देखरेख के। नतीजा—मटके सूखे, यात्री प्यासे।
राहगीरों ने दर्पण न्यूज़ 24×7 के विशेष संवाददाता से बात करते हुए कहा—
“नगर पंचायत ने बस रिबन काटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। वास्तविक सुविधा का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया।”
स्टेशन क्षेत्र में फैली गंदगी को लेकर भी लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। यात्रियों को कूड़े और बदबू के बीच से गुजरकर स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है।
स्थानीय जनता ने नगर पंचायत से सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, प्याऊ में नियमित पानी उपलब्ध कराने और स्टेशन क्षेत्र को संवारने की मांग की है। कहा कि लालकुआँ पूरे कुमाऊँ की पहचान है, इसे उपेक्षा का शिकार न बनने दिया जाए।
