








उफनते गंगाजल ने गर्माई यूपी की सियासत!
प्रयागराज के जलभराव पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर बड़ा हमला, “करोड़ों खर्च के बाद भी पानी निकलने की जगह नहीं”
काशी में घाट डूबे, नाव संचालन ठप, बाढ़ के पानी ने बढ़ाया 2027 का सियासी तापमान !
दर्पण न्यूज़ 24/7 | प्रयागराज/वाराणसी
उत्तर प्रदेश में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रयागराज से लेकर काशी तक घाट और निचले इलाके गंगा की बढ़ती लहरों की चपेट में हैं। लेकिन गंगा के इस उफान के साथ उत्तर प्रदेश की सियासत भी उफनती नजर आ रही है। प्रयागराज में जलभराव को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने योगी सरकार के विकास मॉडल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पिछले करीब दस वर्षों में प्रयागराज में विकास कार्यों और विभिन्न आयोजनों के नाम पर कम से कम एक लाख करोड़ रुपये तक खर्च किए गए होंगे, लेकिन इसके बावजूद शहर में पानी भरा है और पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आती।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि इतना पैसा खर्च होने के बाद भी अगर प्रयागराज में पानी भरा है और उसके निकलने की जगह नहीं है तो विकास के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।
उन्होंने प्रयागराज की सड़कों की हालत पर भी व्यंग्य किया और कहा कि वहां जिस तरह की स्थिति दिखाई दे रही है, उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे चांद की जमीन दिखाने के लिए फिल्म की शूटिंग चल रही हो। अखिलेश के इस बयान ने सियासी बहस को और गरमा दिया है।
गंगा के पानी ने काशी के घाटों को बनाया जलमग्न
प्रयागराज के बाद अब वाराणसी में भी गंगा का रौद्र रूप दिखाई दे रहा है। अस्सी घाट समेत कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। जहां रोजाना श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गंगा आरती का आनंद लेते थे, वहां अब गंगा का पानी दिखाई दे रहा है।
गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण नौका संचालन लंबे समय से प्रभावित है। घाटों पर होने वाली दैनिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं तक प्रभावित बताई जा रही हैं।
स्थानीय नाविकों का कहना है कि पिछले 24 घंटे में जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यदि पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राशन और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं की मांग भी उठने लगी है।
बाढ़ के बीच बड़ा सियासी सवाल
गंगा का बढ़ता जलस्तर भले ही प्राकृतिक चुनौती हो, लेकिन हर साल बाढ़ और जलभराव झेलने वाले शहरों में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी हालात क्यों नहीं सुधर रहे? यही सवाल अब सियासी बहस के केंद्र में है।
अखिलेश यादव के आरोपों ने इस सवाल को और धार दे दी है। एक तरफ सरकार विकास और बड़े आयोजनों के जरिए प्रयागराज और काशी की तस्वीर बदलने का दावा करती है, तो दूसरी तरफ गंगा का बढ़ता पानी जमीनी हकीकत की अलग तस्वीर दिखा रहा है।
गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियां डुबो रहा है और सियासत में आरोप-प्रत्यारोप की लहरें उठ रही हैं। सवाल अब सिर्फ बाढ़ का नहीं—विकास, जल निकासी और करोड़ों के खर्च के बाद भी बदहाल इंतजाम का है।
क्या गंगा का उफान यूपी की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले नया मुद्दा तैयार कर रहा है?
दर्पण न्यूज़ 24/7
