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युद्ध थमने के आसार नहीं, पश्चिम एशिया में हमलों से बढ़ा तनाव!
दर्पण न्यूज 24/7दुबई।
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष थमने के बजाय और तेज होता जा रहा है। करीब पांच सप्ताह से जारी इस युद्ध में अब तक शांति के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। शुक्रवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में एक साथ हवाई हमले कर हालात को और गंभीर बना दिया।
पहले क्रम में, कुवैत में समुद्री पानी को पेयजल में बदलने वाला एक प्रमुख विलवणीकरण संयंत्र हमले में क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे जल आपूर्ति पर संकट गहराने की आशंका है। इसके साथ ही मीना अल अहमदी तेल रिफाइनरी में आग लग गई, जिसे बुझाने में दमकलकर्मी जुटे हुए हैं।
दूसरे क्रम में, बहरीन में हवाई हमलों के बीच सायरन बजने लगे, जबकि सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने ईरान के कई ड्रोन मार गिराए। संयुक्त अरब अमीरात में भी एहतियातन रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गईं।
तीसरे क्रम में, जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका और इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई स्थानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अगले दो-तीन सप्ताह तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
चौथे क्रम में, इस संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखा जा रहा है, जहां से विश्व के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
पांचवें क्रम में, युद्ध के बीच शांति की पहल भी सामने आई है। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने बातचीत के जरिए समाधान का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और बदले में प्रतिबंध हटाने की बात कही है।
छठे क्रम में, युद्ध के मानवीय नुकसान भी गंभीर हैं। अब तक ईरान में 1900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजराइल में 19 लोगों के मारे जाने की खबर है। कई अहम ऊर्जा और जल संसाधन इस संघर्ष की चपेट में आ चुके हैं।
अंतिम क्रम में, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत तैनात किए जा रहे हैं। पूर्व सीआईए प्रमुख बिल बर्न्स ने चेतावनी दी है कि जमीनी युद्ध की स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
निष्कर्ष:
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। ऊर्जा आपूर्ति, जल संकट और आर्थिक अस्थिरता के बीच दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति कब और कैसे इस युद्ध को रोक पाएगी।

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