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उत्तराखंड वन महकमे के पूर्व उप प्रभागीय वनाधिकारी पर फर्जी तलाक के कागजात दिखाकर दूसरी शादी का आरोप, गिरफ्तारी के बाद भेजे गए जेल।

वैवाहिक वेबसाइट से हुई पहचान, शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, 50 लाख रुपये की मांग और पहली पत्नी से तलाक छिपाने का आरोप।

देहरादून | दर्पण न्यूज 24×7

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वन विभाग के एक चर्चित अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे पूर्व उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव नयन नौटियाल को पुलिस ने एक महिला की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

महिला का आरोप है कि वर्ष 2025 में उसकी पहचान एक वैवाहिक परिचय वेबसाइट के माध्यम से राजीव नयन नौटियाल से हुई थी। आरोप है कि अधिकारी ने स्वयं को तलाकशुदा बताते हुए न्यायालय के कथित तलाक आदेश की प्रति दिखाई और भरोसा दिलाया कि उसका वैवाहिक विवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

शिकायत के अनुसार 2 अक्टूबर 2025 को दोनों की सगाई हुई। इसके बाद विवाह का आश्वासन देकर आरोपी ने कई बार महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए। 10 फरवरी 2026 को दोनों ने डालनवाला क्षेत्र के एक मंदिर में विवाह भी किया।

महिला का कहना है कि शादी के बाद आरोपी ने उसे अपने नथुवावाला स्थित घर में रखने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उस पर 50 लाख रुपये लाने का दबाव भी बनाया गया। बाद में महिला को पता चला कि आरोपी का अपनी पहली पत्नी से विधिक रूप से तलाक हुआ ही नहीं था और उसे कथित रूप से फर्जी दस्तावेज दिखाकर गुमराह किया गया।

महिला ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई, अभद्र व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपी के पिता पर भी वास्तविक वैवाहिक स्थिति छिपाने और पूरे घटनाक्रम में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार 12 जुलाई 2026 को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य मिलने पर विकासनगर के दिनकर विहार स्थित आवास से आरोपी को देर रात गिरफ्तार किया गया। अगले दिन न्यायालय में पेश करने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजीव नयन नौटियाल इससे पहले अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। खनन माफिया से टकराव के दौरान उनके साथ मारपीट की घटना भी सामने आई थी। उस प्रकरण में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। हाल ही में राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से भी बर्खास्त कर दिया था।

कुल मिलाकर मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक न्यायालय में आरोप सिद्ध न हो जाएं। यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में फर्जी तलाक के दस्तावेज, तथ्यों को छिपाकर विवाह करने और धोखाधड़ी के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला वैवाहिक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।

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