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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लालकुआं में नहीं मिला इलाज, घायल बुजुर्ग भटके—स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल!
दर्पण न्यूज 24/7| लालकुआँ
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। स्थानीय निवासी 75 वर्षीय राम दत्त पाण्डे घायल अवस्था में इलाज के लिए लालकुआँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां न डॉक्टर मिले और न ही आपातकालीन सुविधा उपलब्ध हो सकी।
परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत में बुजुर्ग को पीएचसी लाया गया, लेकिन केंद्र में चिकित्सक मौजूद नहीं थे। ड्यूटी पर तैनात बताई जा रही डॉक्टर प्रेमलता और मुख्य चिकित्सा अधिकारी  से फोन पर संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई।
स्थिति बिगड़ती देख परिजन बुजुर्ग को निजी अस्पताल ले गए, जहां उनका उपचार कराया गया।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल!
यह घटना सीधे तौर पर सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपात स्थिति में भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है, तो ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जनता किस पर भरोसा करे?
“कागजों में व्यवस्थाएं, जमीनी हकीकत शून्य”
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। आपातकालीन सेवाएं कागजों तक सीमित नजर आती हैं।
सरकार और महकमे के लिए चेतावनी!
यह मामला सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अगर समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो ऐसे मामलों में किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब जरूरत है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करे और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए।

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