पत्रकार की गिरफ्तारी पर कोतवाली में हंगामा, कांग्रेसियों के साथ पत्रकारों का धरना, कोर्ट से मिली जमानत!
रुद्रपुर में रुपेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद गरमाया मामला, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल; सीजेएम ने बीएनएस की धारा 109 के आरोप को नहीं माना, 50-50 हजार के दो जमानती मुचलकों पर रिहाई!
रुद्रपुर। वरिष्ठ पत्रकार रुपेश कुमार की गिरफ्तारी ने रुद्रपुर में हलचल मचा दी। देर रात मारपीट और धारदार हथियार से जानलेवा हमले के आरोप में हुई गिरफ्तारी के विरोध में बुधवार सुबह पत्रकारों और कांग्रेस नेताओं ने कोतवाली में धरना देकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मामला तब और गरमा गया, जब अदालत में पेशी के दौरान बीएनएस की धारा 109 को लेकर बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। सुनवाई के बाद सीजेएम ने इस धारा के आरोप को प्रथम दृष्टया गलत मानते हुए रुपेश कुमार को जमानत दे दी।
रुपेश की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कोतवाली में पत्रकारों और कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लग गया। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, गदरपुर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसारी, पवन वर्मा, हरीश पनेरू और किच्छा चेयरमैन राजेश प्रताप सिंह समेत तमाम कांग्रेसजन धरने पर बैठ गए। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे पत्रकारों ने भी पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई।
धरनारत पत्रकारों और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि रुपेश कुमार को साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया है। उनका कहना था कि पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना गंभीर धारा में गिरफ्तारी कर ली। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को लेकर अपना पक्ष भी रखा है।
हादसे के बाद मारपीट और जानलेवा हमले का आरोप!
पुलिस के मुताबिक, तीन नवंबर की देर रात रुद्रपुर-काशीपुर हाईवे पर दानपुर के पास स्विफ्ट डिजायर कार (यूके 06 एजेड 5934) ने बोलेरो (यूके 06 एजेड 9846) को टक्कर मार दी। आरोप है कि बोलेरो सवार लोगों ने जब इसका विरोध किया तो कार चालक रुपेश कुमार ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान धारदार हथियार से एक व्यक्ति के सिर पर वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर बेहोश हो गया।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 109 के तहत मुकदमा दर्ज कर रुपेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में धारा 109 पर उठे सवाल, मिली जमानत
बुधवार सुबह रुपेश कुमार को सीजेएम न्यायालय में पेश किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने पुलिस की ओर से लगाई गई बीएनएस की धारा 109 पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जानलेवा हमले की यह धारा नहीं बनती। अधिवक्ताओं का कहना था कि मामला सड़क दुर्घटना और उसके बाद हुई मारपीट से जुड़ा है, लेकिन पुलिस ने पर्याप्त विवेचना के बिना गंभीर धारा लगा दी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों का अध्ययन किया। इसके बाद सीजेएम ने धारा 109 के आरोप को गलत मानते हुए 50-50 हजार रुपये के दो जमानती और निजी मुचलका दाखिल करने की शर्त पर रुपेश कुमार को जमानत दे दी।
रुपेश के अधिवक्ता के मुताबिक, अब मामले में धारा 323 सहित एक अन्य धारा के तहत मुकदमा चलेगा।
अब पुलिस की विवेचना पर टिकी निगाहें
पत्रकार की गिरफ्तारी के विरोध में कोतवाली में हुए धरने और अदालत से मिली जमानत के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर पुलिस का आरोप है कि सड़क हादसे के बाद मारपीट में धारदार हथियार से हमला किया गया, वहीं रुपेश कुमार और उनके समर्थक इसे जानबूझकर फंसाने की कोशिश बता रहे हैं।
अदालत से जमानत मिलना मामले में अंतिम दोषमुक्ति नहीं है। अब असली परीक्षा पुलिस की निष्पक्ष विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों की होगी। सवाल यह भी है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और गंभीर धारा लगाने के पीछे पुलिस के पास क्या ठोस आधार थे? इन सवालों का जवाब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

