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‘विद्या – सपनों की उड़ान’ आज होगी रिलीज, वांण गाँव की संघर्षगाथा बड़े पर्दे पर
देहरादून/दर्पण न्यूज 24×7। ग्रामीण शिक्षा की वास्तविकताओं और उम्मीदों को नए आयाम देने वाली सामाजिक फिल्म ‘विद्या – सपनों की उड़ान’ आज शुक्रवार, 28 नवंबर को उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। रियल कॅलिबर प्रोडक्शन्स की यह फिल्म उत्तराखंड के दूरस्थ देवाल ब्लॉक के वांण गाँव, लाटू देवता और माँ नंदा देवी के पवित्र परिसर में फिल्माई गई है, जो इसे और भी प्रामाणिक और संवेदनशील बनाती है।

गाँव के संघर्ष और बच्चों के सपनों की हकीकत

फिल्म की कहानी वांण गाँव में वर्षों से विद्यालय न होने की समस्या के इर्द-गिर्द घूमती है। शिक्षा के अभाव को अपने जीवन में महसूस कर चुके गाँव के युवा जब बाहर पढ़कर लौटते हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि शिक्षा ही विकास का असली आधार है। इसके बाद वे अपने गाँव में स्कूल खोलने की मुहिम छेड़ते हैं—जहाँ उन्हें प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी मिलता है और कुछ विरोध का सामना भी करना पड़ता है।
लगातार संघर्ष, जिद और सामूहिक पहल अंततः सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में बदल जाती है और गाँव के बच्चों का वर्षों पुराना सपना पूरा होता है।

“यह फिल्म सिर्फ कहानी नहीं, एक आंदोलन है”—निर्देशक

फिल्म उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग और फिल्म विकास परिषद की अनुमति से निर्मित हुई है। निर्देशक संजीब दास ने कहा कि “विद्या की यात्रा उन सभी बच्चों की आवाज़ है, जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।”

स्थानीय कलाकारों की दमदार मौजूदगी

फिल्म में एकता तिवारी, सतीश शर्मा, सुशांत कांड्या, साहिल शिवराम, मानसी मिश्रा, दीपक्क बंगवाल, रमेश रावत, सुशील यादव, पल्लवी पाठक और चाइल्ड आर्टिस्ट भावना रोकड़े, तेजस्विनी गंगोला, यशिका और सारांश ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं।

फिल्म की मजबूत टीम

कार्यकारी निर्माता : सुदीप जुगरान

निर्माता : तेजोराज पटवाल, व्यंकट पुंडीर

पटकथा : विराट भट्ट, विजय तिवारी

सिनेमैटोग्राफी : हर्ष शर्मा

संपादन : विकास अरोरा

संगीत : नवीन शिवराम

प्रेस वार्ता में उमड़ा उत्साह

फिल्म की प्रेस वार्ता उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में आयोजित हुई, जिसमें सतीश शर्मा, तेजोराज पटवाल, व्यंकट पुंडीर, शीनू कौर, सुदीप जुगरान, अरुण घिल्डियाल, परविंदर सिंह, रक्षित नंदा समेत पूरी निर्माता टीम मौजूद रही।

‘विद्या – सपनों की उड़ान’ न सिर्फ एक फिल्म है बल्कि ग्रामीण शिक्षा और सामाजिक बदलाव का संदेश लेकर आई एक प्रेरक यात्रा है, जिसे हर दर्शक को देखना चाहिए।

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