भानदेवनवाड़ में फिर टूटा हाथियों का कहर।
वन विभाग की लापरवाही बेनक़ाब, सरकारी तंत्र ने सीएम निर्देशों की उड़ाई धज्जियां।
ग्रामीणों की फसल चौपट, दहशत में बीती रात।
हल्दूचौड़।
क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इससे भी तेज़ी से सामने आ रही है वन विभाग की लापरवाही। शनिवार देर रात भानदेवनवाड़ गांव में हाथियों के झुंड ने ऐसा उत्पात मचाया कि ग्रामीण पूरी रात दहशत में जागते रहे।
ग्रामीण पूरन तिवारी बाल बाल बचे उन्होंने बताया कि सायं साढ़े सात बजे जैसे ही वह घर से बाहर निकले ही थे कि अहाते में खड़े एक हिंसक हाथी से उनका आमना-सामना हो गया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर हाथी गन्ने के खेतों की ओर बढ़ा।
पूरी रात खेत रौंदते रहे हाथी, नौलख की गन्ने की फसल तबाह
हाथियों के झुंड ने कई ग्रामीणों की मेहनत की कमाई पर पानी फेर दिया। खेतों में उगी गन्ने की लहलहाती फसल रातों-रात मिट्टी में मिल गई। सुबह तक झुंड तो वापस जंगल लौट गया, लेकिन पीछे छोड़ गया तबाही, भय और वन विभाग की नाकामी की नई कहानी।
सीएम के निर्देश धरे के धरे – वन विभाग की “कागजी व्यवस्था” उजागर
ग्रामीणों का साफ आरोप है—सरकार और वन विभाग सिर्फ बैठकों व प्रेस नोटों में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर न गश्त बढ़ी, न सुरक्षा तंत्र तैयार हुआ, न ही त्वरित रेस्पॉन्स टीम दिखाई देती है।
वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचने की जहमत तक नहीं उठाते। नतीजा—ग्रामीणों की जान जोखिम में और फसलें हाथियों के हवाले।
ग्रामीण बोले—”हम भगवान भरोसे… जंगल पर हाथी, गांवों पर हमले, और विभाग सो रहा”
पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें उठाई जा रही हैं, लेकिन सिस्टम में मानो कोई सुनने वाला नहीं। हाथियों के लगातार गांवों में घुसने के बावजूद विभाग सिर्फ कागजों में ‘एक्टिव’ नजर आता है।
ग्रामीणों ने चेताया—अगर उपाय नहीं हुए तो आंदोलन तय
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल गश्त बढ़ाने, रेस्पॉन्स टीम सक्रिय करने और फसल सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग की है। कहा—
“अब हालात काबू नहीं हुए तो मजबूरन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”
भानदेवनवाड़ गांव की कल
की रात एक बार फिर साबित कर गई कि जंगली हाथियों के आतंक से ज्यादा घातक है सरकारी तंत्र की लापरवाही और वन विभाग की सुस्ती।
