“कालीचौड़ धाम में उतरी शिव कृपा — हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा आस्था का आकाश”!
✍️ दर्पण न्यूज 24/7 के संपादक धर्मेंद्र शर्मा की कलम से
हल्द्वानी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर गौलापार स्थित प्राचीन और सिद्धपीठ कालीचौड़ मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भोर की पहली किरण के साथ ही हजारों भक्त मंदिर परिसर में उमड़ पड़े और भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा और बेर अर्पित कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया। “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा और वातावरण दिव्य ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
सिद्धपीठ की महिमा ने खींचा श्रद्धालुओं का सैलाब
कालीचौड़ मंदिर की गणना क्षेत्र के प्राचीन सिद्धपीठों में की जाती है। मान्यता है कि यह स्थान प्राचीन ऋषियों की तपोस्थली रहा है, जहां सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के इस पुण्य अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने उमड़े।
भक्ति, विश्वास और उत्साह का अद्भुत संगम
सूर्योदय से पहले ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी शिव भक्ति में लीन नजर आए। पूरा परिसर मेले जैसा प्रतीत हो रहा था, जहां हर चेहरा आस्था और श्रद्धा से दमक रहा था। भक्तों ने भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मंदिर कमेटी के कार्यकर्ता मुस्तैद रहे, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
शहर के अन्य शिवालयों में भी उमड़ी श्रद्धा
कालीचौड़ मंदिर के साथ-साथ छोटा कैलाश मंदिर, बेल बाबा मंदिर और पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सभी शिवालयों में भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आस्था का जीवंत प्रतीक बना कालीचौड़ धाम
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर कालीचौड़ मंदिर एक बार फिर श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। भक्तों की अटूट आस्था और भगवान शिव के प्रति समर्पण ने इस पावन स्थल को दिव्यता के चरम पर पहुंचा दिया।
महादेव की नगरी में उमड़ा यह आस्था का सैलाब इस बात का प्रतीक है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो भगवान स्वयं अपने भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए तत्पर रहते हैं।
