








“दिल में बसा रुद्रपुर, जुबां से निकला इशारा — सियासत ने पढ़ लिया धामी का इशारा”
प्रमोद बमेटा दर्पण न्यूज 24/7 |
रुद्रपुर। कभी बातों-बातों में कही गई एक मुस्कान भरी पंक्ति, सियासत के गलियारों में तूफान ला देती है। कुछ ऐसा ही हुआ जब पुष्कर सिंह धामी ने सरस मेले की जनसभा में सहज अंदाज में रुद्रपुर से चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र कर दिया। बात हल्की थी, लेकिन असर भारी पड़ गया—अब हर नुक्कड़, हर चाय की दुकान और हर राजनीतिक बैठक में बस इसी चर्चा की गूंज है।
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा—“रुद्रपुर भी हमारा है, काशीपुर भी हमारा है, गदरपुर भी हमारा है, खटीमा भी हमारा है… पूरा जिला ही हमारा है।” बस, इतना कहना था कि समर्थकों के दिलों में उम्मीदों के दीये जल उठे और सियासत के समीकरणों ने करवट लेना शुरू कर दिया।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह महज मंचीय संवाद नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संकेत भी हो सकता है। धामी का रुद्रपुर से पुराना लगाव रहा है। संगठन के दिनों से ही यहां के कार्यकर्ताओं और जनता से उनका सीधा जुड़ाव रहा है। यही वजह है कि स्थानीय कार्यकर्ता इस बयान को “दिल की बात” मान रहे हैं, न कि सिर्फ “मंच की बात”।
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस बयान के बाद खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि यदि भविष्य में ऐसा निर्णय होता है तो क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनेंगे और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
जनसभा के दौरान जब धामी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए रुद्रपुर की गलियों से अपने अपनत्व का जिक्र किया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने साफ कहा कि उत्तराखंड की सभी 70 सीटें उनके परिवार का हिस्सा हैं और हर सीट पर कमल खिलाना ही उनका लक्ष्य है।
इस दौरान उन्होंने सांसद अजय भट्ट का जिक्र करते हुए हल्के अंदाज में कहा कि बड़े भाई उन्हें डीडीहाट से चुनाव लड़ने की सलाह देते हैं, जबकि उनका दिल खटीमा से भी जुड़ा है।
अब सवाल यह नहीं कि धामी ने क्या कहा… सवाल यह है कि उन्होंने क्यों कहा।
क्या यह सिर्फ मंच की मुस्कान थी, या आने वाले चुनाव की कहानी का पहला शेर?
फिलहाल सियासत इंतजार में है—
क्योंकि कभी-कभी इशारे ही पूरी कहानी लिख देते हैं।
