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पेंशन पर रोक बनी सत्ता के लिए खतरा! 2027 में सरकार को भुगतना पड़ेगा खामियाजा।

108दिनों से आंदोलनरत सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित कर्मचारियों ने किया आंदोलन स्थगित।
दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून।
लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड के सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित कर्मचारियों की पेंशन पर लगाए गए सरकारी ब्रेक ने सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। 16 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश से आहत कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो इसका राजनीतिक खामियाजा सरकार को वर्ष 2027 में भुगतना पड़ेगा।
संयुक्त संघर्ष समिति के प्रान्तीय अध्यक्ष खेमराज सिंह कुंडरा और सचिव हिकमत सिंह नेगी ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 2011 के ऐतिहासिक फैसले (प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश एवं अन्य) के बावजूद सरकार वर्कचार्ज सेवा को जोड़कर पेंशन देने से पीछे हट रही है। वर्ष 2023 तक इस निर्णय के तहत पेंशन दी जाती रही, लेकिन उसके बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित कर दिया गया।
पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों ने 108 दिनों तक क्रमिक अनशन किया। लंबे आंदोलन के बाद कैबिनेट से वर्कचार्ज सेवा जोड़कर पेंशन देने का प्रस्ताव भी पारित हुआ, लेकिन ताजा शासनादेश ने न केवल नए मामलों पर रोक लगा दी, बल्कि जिन कर्मचारियों को पहले से पेंशन मिल रही थी, उस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला बुजुर्गों के जीवनयापन पर सीधा प्रहार है।
सरकार की हठधर्मिता से विवश होकर फिलहाल आंदोलन स्थगित किया गया है, लेकिन संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि लड़ाई खत्म नहीं हुई है। आगे आंदोलन को गोपनीय रणनीति के तहत और तेज किया जाएगा। समिति का दावा है कि पेंशन से जुड़े इस फैसले की गूंज 2027 के चुनावी परिणामों में साफ सुनाई देगी।
यह खबर दर्पण न्यूज 24/7 के

उत्तराखंड