पेट्रोल-डीजल के दाम कंट्रोल में रखने को केंद्र सरकार की बड़ी रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस!
दर्पण न्यूज 24/7 | नेशनल डेस्क
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रखते हुए ईंधन आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात आधारित देशों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चिंता बढ़ी हुई है, क्योंकि विश्व की बड़ी तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। यदि यहां किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल संभव है।
सीमित भंडार, लेकिन सरकार सतर्क
सरकारी आकलन के अनुसार भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार लगभग 17-18 दिनों की जरूरत पूरी करने में सक्षम है, जबकि पेट्रोल और डीजल का स्टॉक करीब तीन सप्ताह तक चल सकता है। संभावित संकट को देखते हुए सरकार ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है।
निर्यात नियंत्रण और घरेलू आपूर्ति प्राथमिकता
सूत्रों के मुताबिक सरकार पेट्रोल और डीजल के निर्यात को सीमित करने की रणनीति पर भी विचार कर रही है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित न हो। तेल विपणन कंपनियों को पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
रूस समेत वैकल्पिक स्रोतों पर नजर
ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए भारत रूस सहित अन्य देशों से अतिरिक्त कच्चे तेल आयात के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। बीते वर्षों में रियायती दरों पर तेल आयात भारत के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण मौजूदा संकट में अहम भूमिका निभाएगा।
LPG-LNG आपूर्ति भी चिंता का विषय
भारत की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। समुद्री परिवहन प्रभावित होने की स्थिति में एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इसे देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दे रही है।
महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप किया जाएगा।
निर्यातकों को भी सतर्क रहने की सलाह
परिवहन लागत बढ़ने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए निर्यात क्षेत्र को भी सतर्क किया गया है। सरकार ने उद्योग जगत को आवश्यक वित्तीय एवं नीतिगत सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
कुल मिलाकर, मध्य पूर्व का मौजूदा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है, लेकिन भारत ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाकर पेट्रोल-डीजल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को संतुलित रखने की दिशा में तैयारी तेज कर दी है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम स्थिति की दिशा तय करेंगे।
